3 औषधियों का ये मिश्रण है इन 18 रोगों का काल, नहीं होने देगा आपको ये जानलेवा रोग

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अनेक बार रोगी उपचार हेतु एलोपैथिक चिकित्सक के पास जाता है. एलोपैथिक उपचार करवाने पर भी जब उसे स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं दिखता, वह आयुर्वेदिक उपचार की ओर मुडता है. जब तक वह आयुर्वेदिक उपचार की ओर मुडता है, रोग उसके शरीर में घर कर चुका होता है, और उन औषधियों पर अत्यधिक धन व्यय हो चुका होता है, साथ ही उसे उन औषधियों के दुष्प्रभाव भी झेलने पडते हैं.

आयुर्वेदिक उपचार करवाने के उपरांत रोगी को रोग ठीक होने का भान होता है. तब वह यह विचार करने लगता है, कि अच्छा होता यदि मैं आरंभ से ही आयुर्वेदिक उपचार करवाता. इसलिए ऐसा ना हो तथा हानिकारक दुष्प्रभावों से बचने के लिए, रोग के आरंभ में ही आयुर्वेदिक उपचार करवाना आवश्यक है. इसीलिए हम यहाँ आपको कुछ औषधियां बतायेंगे जिनके द्वारा आप कई बीमारियों इलाज कर सके.

औषिधि तैयार करने का तरीका : 250 ग्राम मैथीदाना, 100 ग्राम अजवाईन, 50 ग्राम काली जीरी. उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना (ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर कांच की शीशी या बरनी में भर लेवें.

सेवन करने का तरीका : रात्रि को सोते समय एक चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी के साथ लेना है. गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है, लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है.

चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी (कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी. पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा. चमड़ी की झुर्रिया अपने आप दूर हो जाएगी. शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा.

18 रोगों में है फायदेमंद है : गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा, हड्डियाँ मजबूत होगी, आँखों रौशनी बढ़ेगी, बालों का विकास होगा, पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति, शरीर में खुन दौड़ने लगेगा, कफ से मुक्ति, हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी.

थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें, स्मरण शक्ति बढ़ेगी, स्त्री का शारीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा, कान का बहरापन दूर होगा, भूतकाल में जो एलोपैथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें, खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी, शरीर की सभी खून की नलिकाए शुद्ध हो जाएगी, दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा, नपुसंकता दूर होगी.

डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है, वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा. जिंदगी निरोग,आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्ययवर्धक बनेगी. जीवन जीने योग्य बनेगा.

यहाँ भी ध्यान दे : कुछ लोग कलौंजी को काली जीरी समझ रहे है, जो कि गलत है. काली जीरी अलग होती है जो आपको पंसारी या आयुर्वेद की दुकान से मिल जाएगी, जिसके नाम इस तरह से है।हिन्दी कालीजीरी, करजीरा, संस्कृत अरण्यजीरक, कटुजीरक, बृहस्पाती, मराठी कडूकारेलें, कडूजीरें, गुजराती कडबुंजीरू, कालीजीरी, बंगाली बनजीरा, अंग्रेजी पर्पल फ्लीबेन.

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