उष्ट्रासन(Ushtra asana)को दो तरह से किया जाता है। इस आसन का अभ्यास अनेक रोगों में लाभकारी होता है तथा योग में इस आसन को महत्वपूर्ण आसन माना गया है।

उष्ट्रासन से होने वाले लाभ : Ustrasana ke Fayde /  Labh / Benefits

★ उष्ट्रासन पेट की चर्बी को कम करता है तथा मोटापे को दूर कर शरीर को सुडौल व सुंदर बनाता है।
★ इस आसन को करने से स्त्रियों के अनेक रोग दूर हो जाते हैं तथा यह गर्दन की अधिक चर्बी को कम करके उसे पतली व सुंदर बनाता है।
★ इस आसन से पीठदर्द, कमरदर्द आदि ठीक होते हैं। इस आसन को करने से कंठ, श्वासनली तथा फुफ्फुस की क्रियाशीलता बढ़ती है तथा कंठ व सांस के सभी रोगों से बचाव होता है।
★ उष्ट्रासन(Ushtra asana) मेरूदंड में लचीलापन लाता है तथा जीवनी शक्ति को बढ़ाकर युवावस्था को अधिक समय तक बनाएं रखता है।
★ यह आसन फेफड़े के रोगों को दूर करता है।
★ इस आसन से छाती चौड़ी तथा जांघें, बांहे व टांगे मजबूत होती हैं।
★ यह पेट व आमाशय के रोगों को दूर करता है तथा कामेन्द्रियो को पुष्ट करता है।

उष्ट्रासन की विधि : Ustrasana Steps in Hindi / Ustrasana ki Vidhi

पहली विधि :

★ उष्ट्रासन (Ustrasana)का अभ्यास स्वच्छ व शांत स्वच्छ हवादार वातावरण में करना चाहिए।
★ इस आसन को करने के लिए जमीन पर दरी बिछाकर घुटनों के बल खड़े हो जाएं अर्थात दोनो पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर ले जाकर घुटनों के सहारे सीधे खड़े हो जाएं।
★ इसके बाद दोनों घुटनो को मिलाकर तथा एड़ी व पंजों को मिलाकर रखें।
★ अब सांस अंदर खींचते हुए धीरे-धीरे शरीर को पीछे की ओर झुकाकर दोनों हाथों से दोनों एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें।
★ इस स्थिति में ठोड़ी ऊपर की ओर करके व गर्दन को तान कर रखें और दोनों हाथों को भी तानकर सीधा रखें।
★ सामान्य रूप से सांस लेते हुए इस स्थिति में 30 सैकेंड से 1 मिनट तक रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं।
★ इसके बाद सामान्य रूप से सांस लेते हुए 2 मिनट तक आराम करें और फिर इस क्रिया को करें। इस तरह इस क्रिया को 3 बार करें।

दूसरी विधि :

★ उष्ट्रासन(Ustrasana) में पहले की तरह ही घुटनों के बल बैठ जाएं और फिर घुटनों व एड़ियों को मिलाकर रखें।
★ इसके बाद सांस लेकर शरीर को धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकाते हए दोनों हाथों को पीछे पंजों से आगे फर्श पर टिकाएं और शरीर को सीधा व तानकर रखें।
★ इस स्थिति में आने के बाद सांस सामान्य रूप से लेते हुए इस स्थिति में आधे से 1 मिनट तक रहें।
★ इसके बाद सामान्य स्थिति में आकर 2 मिनट तक आराम करें। इस क्रिया को 3 बार करें।

विशेष :

दूसरी विधि पहले से आसान है, इसलिए पहली विधि से आसन करने में कठिनाई हो तो पहले दूसरी विधि से आसन का अभ्यास करे और उसके बाद पहली विधि का आसन करें।

उष्ट्र” एक संस्कृत भाषा का शब्द है और इसका अर्थ “ऊंट” होता है। उष्ट्रासन को अंग्रेजी में “Camel Pose” कहा जाता है। उष्ट्रासन एक मध्यवर्ती पीछे झुकने-योग आसन है जो अनाहत (ह्रदय चक्र) को खोलता है| इस आसन से शरीर में लचीलापन आता है, शरीर को ताकत मिलती है तथा पाचन शक्ति बढ़ जाती है। उष्ट्रासन करने की प्रक्रिया और उष्ट्रासन के लाभ नीचे दिए गए हैं :

उष्ट्रासन करने की प्रक्रिया | How to do Ustrasana

  1. अपने योग मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें|
  2. घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आकाश की तरफ हो|
  3. सांस लेते हुए मेरुदंड को पुरोनितम्ब की ओर खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है।
  4. गर्दन पर बिना दबाव डालें तटस्थ बैठे रहें
  5. इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहे|
  6. सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं|
  7. हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं|

शुरूआत में यह आसन किस प्रकार करें

अपनी सुविधा के लिए आप अपने घुटनों के नीचे तकिए का प्रयोग कर सकते हैं|

उष्ट्रासन के लाभ | Ustrasana benefits in hindi

  1. पाचन शक्ति बढ़ता है।
  2. सीने को खोलता है और उसको मज़बूत बनाता है|
  3. पीठ और कंधों को मजबूती देता है|
  4. पीठ के निचले हिस्से में दर्द से छुटकारा दिलाता है|
  5. रीढ़ की हड्डी में लचीलेपन एवं मुद्रा में सुधार भी लाता है|
  6. मासिक धर्म की परेशानी से राहत देता है|

किन किन स्थितियों में उष्ट्रासन नहीं करना चाहिए |Contraindications of the Ustrasana

या गर्दन में चोट, उच्च या निम्न रक्तचाप से ग्रस्त लोग यह आसन केवल एक अनुभवी शिक्षक के निगरानी में करें।

Loading...