जमीन पर बैठकर खाना खाने के फायदे, जानेंगे तो फिर नहीं बैठेंगे कुर्सी-टेबल पर

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जमीन पर बैठकर खाना खाने के फायदे, जानेंगे तो फिर नहीं बैठेंगे कुर्सी-टेबल पर आधुनिकता के साथ-साथ हमारी कुछ परंपराओं और आदतों में भी परिवर्तन हुआ है। इन परिवर्तनों से हमें फायदा कम और नुकसान ज्यादा उठाना पड़ रहा है। इनमें से एक है जमीन पर बैठकर खाना खाना। हमारी इस आदत में परिवर्तन के कारण हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इंसान कम उम्र में जहां कई रोगों से ग्रसित हो रहा है, वहीं उसकी जवानी में बुढ़ापा झलकने लगा है। पहले परिवार के सभी सदस्य जमीन पर बैठकर खाना खाते थे, लेकिन समय परिवर्तन के साथ इंसान की यह आदत भी बदल गई है। आधुनिकता की इस दौड़ में अब इंसान कुर्सी-टेबल पर बैठकर खाना खाता है, जिससे हमारे स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव पड़ता है।

वर्तमान समय में अधिकतर लोग जमीन पर बैठकर खाना नहीं खाते हैं, जबकि कुछ ऐसे हैं जो टीवी के सामने बैठकर या बिस्तर पर बैठकर खाना पसंद करते हैं। भले ही, यह आपके लिए बहुत आरामदायक हो, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। जमीन पर बैठकर खाने की आदत स्वास्थ्य के लिए कितनी उपयोगी है, आईये जानते हैं-

सुखासन: पाचन में मदद करने वाली मुद्रा

आमतौर पर जब आप जमीन पर बैठते हैं तो सुखासन में बैठते हैं, जो कि पाचन में मदद करने वाली मुद्रा है। जब आप भोजन करने के लिए इस मुद्रा में बैठते हैं तो पेट से जुड़ी समस्याएं कम होती है। इसके अलावा जब आप जमीन पर बैठ कर खाना खाते हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से खाने के लिए थोड़ा आगे झुकते हैं और खाने को निगलने के लिए वापस अपनी पहले वाली अवस्था में आ जाते हैं। इस तरह लगातार आगे और पीछे की ओर झुकने से आपकी पेट की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। साथ ही, यह आपके पेट में एसिड को भी बढ़ाता है। इस तरह आपके लिए भोजन को पचाना बहुत आसान हो जाता है।
दिमाग रहता है शांत

जब आप सुखासन में बैठते हैं, तो आपका दिमाग अपने आप शांत हो जाता है। वह बेहतर ढंग से भोजन पर ध्यान केंद्रित कर पाता है। डायनिंग टेबल की बजाए सुखासन में बैठ कर खाने पर खाने की गति धीमी होती है। यह पेट और दिमाग को सही समय पर तृप्ति का एहसास करवाता है। इस प्रकार सुखासन में बैठकर खाने पर आप जरूरत से ज्यादा खाने से बचते हैं।

आराम से काम करता है डाइजेस्टिव सिस्टम
जब आप पद्मासन में बैठते हैं, तो आपकी निचली पीठ, पेट के आसपास और पेट की मांसपेशियों में खिंचाव होता है। जिसके कारण डाइजेस्टिव सिस्टम आराम से अपना काम कर पाता है। इसके अलावा, यह स्थिति किसी भी प्रकार से आपके पेट पर दबाव नहीं डालती, जिससे आपको खाने में और बेहतर रीति से पचाने में मदद मिलती है।

पोषण को स्वीकार करता है शरीर
जब आप परिवार के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं तो आपका ध्यान खाने में रहता है। यह केवल आपके ध्यान को ही खाने पर केंद्रित नहीं करता, बल्कि खाना खाते समय बेहतर विकल्प को चुनने में भी मदद करता है, क्योंकि इस मुद्रा में आपका मन बहुत शांत और आपका शरीर पोषण को स्वीकार करने के लिए तैयार रहता है। जमीन पर बैठकर भोजन करने की प्रथा सही मात्रा में खाना खाने के लिए और सही प्रकार का भोजन करने के लिए सबसे अच्छी है।

परिवार में बढ़ता है सामंजस्य
आमतौर पर जमीन पर बैठकर खाना खाने की प्रथा एक पारिवारिक गतिविधि है। सही समय पर यदि पूरा परिवार एक साथ खाना खाए तो आपसी सामंजस्य बढ़ता है। अपने परिवार के साथ जुडऩे के लिए बहुत अच्छा है, क्योंकि जमीन पर बैठकर भोजन करने से आपका मन शांत और सुखद रहता है, इसलिए यह अपने परिवार के साथ जुडऩे का एक बेहतरीन कारण बन जाता है।

रीढ़ की हड्डी और पीठ की समस्या से छुटकारा
खाना खाने का ये पारंपरिक तरीका आपको समय से पहले बूढ़ा नहीं होने देता हैं, क्योंकि इस मुद्रा में बैठकर खाना खाने से रीढ़ की हड्डी और पीठ से जुड़ी समस्याएं नहीं होती है। साथ ही, जो लोग कंधों को पीछे धकेलते हुए गलत मुद्रा में बैठने के कारण किसी तरह के दर्द से परेशान होते हैं। वह समस्या भी इस आसन में बैठकर खाना खाने से दूर हो जाती है।

लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना
एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग जमीन पर पद्मासन में या सुखासन में बैठते है और बिना किसी सहारे के खड़े होने में सक्षम होते हैं। उनकी लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि इस मुद्रा से उठने के लिए अधिक लचीलेपन और शारीरिक शक्ति की आवश्यकता होती है। इस अध्ययन से यह भी पता चला है कि जो लोग बिना किसी सहारे के उठने में सक्षम नहीं थे, उनकी अगले 6 सालों में मरने की संभावना 6.5 गुना अधिक थी।

पूरे शरीर को मिलता है लाभ
पद्मासन और सुखासन एक ऐसी मुद्रा है जो आपके पूरे शरीर को लाभ पहुंचाती है। ये केवल आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को बेहतर बनाने में ही मदद नहीं करते, बल्कि आपके जोड़ों को कोमल और लचीले बनाए रखने में भी मदद करते हैं। गठिया व हड्डियों की कमजोरी जैसे रोगों से भी बचाते हैं। घुटने, टखने और कमर के जोड़ों को लगातार झुकाने के कारण यह उन्हें लचीला और रोगों से मुक्त रहने में मदद करता है। लचीलेपन के साथ जोड़ों में चिकनाई आती है, जिससे जमीन पर बैठने में आसानी होती है।

दिमाग और तंत्रिकाओं को करता है शांत
जो लोग सुखासन में बैठकर खाना खाते हैं। उनका दिमाग तनाव रहित रहने की संभावना अधिक होती है, क्योंकि यह दिमाग को रिलेक्स और तंत्रिकाओं को शांत करता है। आयुर्वेद में माना गया है कि मन को शांत रखकर खाना खाने से पाचन बेहतर होता है और कुछ मामलों में तो लोगों को स्वाद से भोजन खाने में भी मदद करता है।

ब्लड सर्कुलेशन रहता है ठीक
जब आप जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं तो ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। इस तरह दिल बड़ी आसानी से डाइजेस्ट करने में मदद करने वाले सभी अंगों तक खून पहुंचाता है, लेकिन जब आप कुर्सी पर बैठ कर खाना खाते हैं तो यहां ब्लड सर्कुलेशन विपरीत होता है। इसमें सर्कुलेशन पैरों तक होता है, जो कि खाना खाते समय जरूरी नहीं होता है, जबकि जमीन पर बैठकर खाना खाने से आपको मजबूत मांसपेशियों के साथ एक स्वस्थ दिल मिलता है।

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Source: viratpost

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