महाशिवरात्रि पर करें ये उपाय, हर संकट होगी दूर!

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Happy-Maha-Shivratri-2014

रांची: महाशिवरात्रि अद्भुत संयोग लेकर आ रही है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 7 मार्च, सोमवार को मनाया जाएगा। 12 वर्ष बाद इस तरह का संयोग निर्मित हुआ है जब शिवरात्रि सोमवार को पड़ रही है। सोमवार का दिन महादेव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यह तिथि अपने आप में श्रेष्ठ है। महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की तिथि घनिष्ठा नक्षत्र में मनाई जाएगी।

इस वर्ष महाशिवरात्रि का महत्व कई गुना अधिक होगा। यह भी एक संयोग है कि इसे सिंहस्थ कुंभ का योग भी मिल रहा है। सालों बाद सिंहस्थ का योग निर्मित हुआ है। देव गुरु बृहस्पति, सिंह राशि में गोचर करेंगे। इस प्रकार से यह तिथि धार्मिक कार्यों की दृष्टि से खास है। इस दौरान महाशिवरात्रि की पूजा करने से भगवान प्रसन्न होंगे। साथ ही अपने भक्तों पर विशेष कृपा करेंगे।

msid-51264515,width-300,resमहाशिवरात्रि का पर्व दिन भर पूजन के साथ ही रात भर महादेव की भक्ति करने का होता है। महाशिवरात्रि का अर्थ ही होता है रात्रि में जागरण कर शिव की आराधना करना। महाशिवरात्रि की तिथि को रात में भजन-कीर्तन, शिव नाम जाप करने से भक्तों के कष्टों का अंत होगा। सोमवार को महाशिवरात्रि की तिथि होने से जिन राशि के जातकों की कुंडली में चंद्र देव की स्थिति कमजोर है वे जातक रात में दुग्ध से चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करते हुए आराधना कर इस दोष से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।महाशिवरात्रि का पर्व सोमवार को आने से विशेष संयोग बन रहा है, इस दिन किए गए उपायों से बड़ी से बड़ी समस्याएं भी तुरंत ही समाप्त हो जाएंगी

इस बार महाशिवरात्रि का पर्व सोमवार को आने से विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन किए गए ज्योतिष के उपायों से बड़ी से बड़ी समस्याएं भी तुरंत ही समाप्त हो जाएंगी तथा धन लाभ होगा।  कुछ ऐसे ही शिवपुराण के उपाय जिन्हें शिवरात्रि पर करने से आप सभी समस्याओं से पार पा जाएंगे, इन्हें कोई भी व्यक्ति कर सकता है।

ये है कहानी : धर्म ग्रंथों के अनुसार, एक बार ब्रह्माजी व विष्णुजी में विवाद छिड़ गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। ब्रह्माजी सृष्टि के रचयिता होने के कारण श्रेष्ठ होने का दावा कर रहे थे और भगवान विष्णु पूरी सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में स्वयं को श्रेष्ठ कह रहे थे। तभी वहां एक विराट ज्योतिर्मय लिंग प्रकट हुआ। दोनों देवताओं ने सर्वानुमति से यह निश्चय किया गया कि जो इस लिंग के छोर का पहले पता लगाएगा, उसे ही श्रेष्ठ माना जाएगा। अत: दोनों विपरीत दिशा में शिवलिंग का छोर ढूढंने निकले। छोर न मिलने के कारण विष्णुजी लौट आए।

ब्रह्माजी भी सफल नहीं हुए, परंतु उन्होंने आकर विष्णुजी से कहा कि वे छोर तक पहुंच गए थे। उन्होंने केतकी के फूल को इस बात का साक्षी बताया। केतकी के पुष्प ने भी ब्रह्माजी के इस झूठ में उनका साथ दिया। ब्रह्माजी के असत्य कहने पर स्वयं भगवान शिव वहां प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्माजी की आलोचना की। दोनों देवताओं ने महादेव की स्तुति की, तब शिवजी बोले कि मैं ही सृष्टि का कारण, उत्पत्तिकर्ता और स्वामी हूं। मैंने ही तुम दोनों को उत्पन्न किया है।

शिव ने केतकी पुष्प को झूठा साक्ष्य देने के लिए दंडित करते हुए कहा कि यह फूल मेरी पूजा में उपयोग नहीं किया जा सकेगा।इसीलिए शिव के पूजन में कभी केतकी का पुष्प नहीं चढ़ाया जाता। आपको बता दे कि भगवान पुष्प के अलावा भगवान शिव को कुछ और चीजें भी नहीं चढा़ते है। शिवपुराण के अनुसार शिव भक्तों को कभी भी भगवान शिव को इन इन चीजों का प्रसाद नहीं चढ़ाना चाहिए।

1.नारियल का पानी : हालांकि शिवलिंग पर नारियल अर्पित किया जाता है लेकिन कभी भी शिवलिंग पर नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए। देवताओं को चढ़ाया जाने वाला प्रसाद ग्रहण करना आवश्यक होता है लेकिन शिवलिंग का अभिषेक जिन पदार्थों से होता है उन्हें ग्रहण नहीं किया जाता। इसलिए शिव पर नारियल का जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

2.हल्दी : हल्दी का प्रयोग स्त्रियों की सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसलिए शिवलिंग पर कभी हल्दी नहीं चढ़ाई जाती, क्योंकि वह स्वयं शिव का रूप है।

3.कुमकुम या सिंदूर : सिंदूर, विवाहित स्त्रियों का गहना माना गया है। स्त्रियां अपने पति की लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना हेतु सिंदूर लगाती हैं। लेकिन शिव तो विनाशक हैं, सिंदूर से उनकी सेवा करना अशुभ माना जाता है।

4. बैल को भगवान शिव का वाहन नंदी कह कर पूजा जाता है। अतः महाशिवरात्रि के दिन कम से कम किसी एक गाय, बैल अथवा सांड को हरा चारा, गुड़ आदि अवश्य खिलाना चाहिए, इससे आपके ऊपर आया बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है।

5. महाशिवरात्रि के दिन रात 9 बजे के बाद किसी निर्जन स्थान पर बने हुए शिव मंदिर में जाएं तथा वहां साफ-सफाई कर पूजा-अर्चना करें, दीपक जलाएं। इससे आप पर आई बड़ी से बड़ी समस्या भी दूर हो जाएगी।

6. महाशिवरात्रि की रात को शिवलिंग पर “ऊँ जूं सः” मंत्र का जाप करते हुए दूध मिश्रित जल चढ़ाएं तथा बील पत्र अर्पण करें। इससे स्वयं की तथा परिवार की स्वास्थ्य संबंधी सभी समस्याएं तुरंत ही भाग जाएंगी।

7. महाशिवरात्रि पर एक छोटा सा पारद शिवलिंग घर में लाकर उसकी विधिवत स्थापना करें तथा प्रतिदिन धूप बत्ती, पुष्प आदि चढ़ा पूजा करें। इस उपाय से घर में साक्षात महालक्ष्मी का वास होता है।

8. यदि वैवाहिक जीवन में समस्याएं हो तो किसी सुहागन स्त्री को सुहाग का सामान यथा लाल साड़ी, चूड़ियां, कुमकुम आदि उपहार में दें। गृहस्थ जीवन सुखमय हो जाएगा।

9. शिवरात्रि पर जरूरतमंदों को कुछ न कुछ अवश्य दान दें। यदि किसी अनाथ आश्रम में भोजन दान दे सकें तो दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदल जाएगा।

10. महाशिवरात्रि पर किसी भी शिव मंदिर में जाकर श्रद्धापूर्वक ऊँ नमः शिवाय अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। इससे कुंडली में खराब चल रहे ग्रह भी अनुकूल बन जाते हैं तथा आपके बिगड़े हुए काम भी बनने लगते हैं।

12. शिवपुराण के अनुसार इस दिन बिल्व पत्र के वृक्ष की पूजा-अर्चना कर शिवलिंग के निकट जल चढ़ाना चाहिए। इससे मनावांछित इच्छा पूरी होती है।

13. महाशिवरात्रि पर परिवार सहित भगवान शिव, माता पार्वती, गणेशजी तथा कार्तिकेय की पूजा करनी चाहिए, तथा प्रसाद का भोग लगा कर उसे ग्रहण करना चाहिए। पूजा के बाद किसी गरीब को कुछ न कुछ दान दें। इससे आपके अटके हुए कार्य भी होने लग जाएंगे।

14.केतली के फूल वर्जित : हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं के पूजन में सुगंधित फूलो का बड़ा महत्व है, हम सभी देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए पूजन में सुगंधित पुष्प काम में लेते है। लेकिन क्या आप जानते है कि भगवान शिव की पूजा में केतकी (केतकी संस्कृत का शब्द है हिंदी में इसे केवड़ा कहते है) के फूल का प्रयोग मना हैं! आखिर ऐसा क्यों है! इसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है।

Source: khabarmantra

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