अब जिम को कहें बाय-बाय, एक मिनट की एक्सरसाइज़ ही है काफी

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अब जिम को कहें बाय-बाय, एक मिनट की एक्सरसाइज़ ही है काफी

अगर गौर किया जाए तो रिमोट और मोबाइल ने लोगों को पहले से ज़्यादा आलसी और सुस्त बना दिया है। आज किसी भी काम को करने के लिए घर से बाहर जाने या सोफे से उठने की जरूरत नहीं है। ऐसे में भला कौन उसी काम के लिए गर्मी में दो-तीन घंटे लगाकर आएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं ये आलस हमें बीमारियों के घेर में ले जा रहा है? हमें पहले से ज़्यादा सुस्त बना रहा है, जिससे हमारे शरीर में कई नई बीमारियां घर कर रही हैं।

ऑफिस में लंबे समय तक लगातार बैठे रहने, घर आकर जरूरी काम मोबाइल और फोन की मदद से पूरा कर लेना, रात को देर रात तक लेपटॉप पर काम करके सोना और फिर सुबह देर से उठना आजकल लोगों के लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में उनके पास खुद को देने के लिए ही समय नहीं बचा है, तो भला वे हेल्थ के लिए कहां से समय निकालेंगे। जिम और एक्सरसाइज़ तो जैसे उनकी रूटीन लिस्ट से नदारद हैं।

बस, आपके इसी बिजी शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए हाल ही में एक शोधकर्ताओं ने एक शोध किया। यह शोध पढ़ने के बाद एक्सरसाइज़ न करने का कोई बहाना नहीं चलेगा। शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि एक मिनट की भी तीव्र कसरत 45 मिनट के पारंपरिक कसरत जितना फायदेमंद है। अब इस शोध के बाद तो यह बहाना बनाना भी मुश्किल है कि कसरत करने का तो समय ही नहीं मिलता!

कनाडा के ओंटारियो स्थित मैकमेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ऑफ किसियोलॉजी और शोध दल के प्रमुख मार्टिन गिबाला ने बताया, “यह समय की बचत करने वाली कसरत रणनीति है।”

वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान यह पता लगाया कि स्पिरिट इंटरवल ट्रेनिंग (एसआईटी) मॉडरेट इंटेंसिटी कंटीन्यूअस ट्रेनिंग (एमआईएसटी) की तुलना में कितना प्रभावी है जिसकी सिफारिश सार्वजनिक स्वास्थ्य के दिशा निर्देशों में की जाती है।

शोध के दौरान कार्डियोरेस्परेटरी फिटनेस और इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता की जांच की गई।

इसके तहत कुल 27 सुस्त पुरुषों की भर्ती की गई और उन्हें 12 हफ्तों के लिए गहन और पारंपरिक दोनों तरीकों के कसरत करने को दिए गए, साथ ही एक समूह को बिल्कुल भी कसरत नहीं करने को कहा गया।

एसआईटी प्रोटोकॉल के तहत 20 सेकेंड तक ऑल आउट साइकिल स्प्रिंट कसरत करना था जो सबसे अधिक प्रभावी पाया गया।

इस 10 मिनट के वर्कआउट में 2 मिनट का वार्म अप और तीन मिनट का कूल डाउन भी शामिल था। और तीक्ष्ण कसरतों के बीच में 2 मिनट की आसान साइकिलिंग भी शामिल है।

इस नए अध्ययन में इस समूह की तुलान दूसरे समूह से की गई, जिन्होंने 45 मिनट लगातार साइकिल चलाई साथ वार्मअप और कूलडाउन में सिट प्रोटोकॉल जितना ही समय लिया।

ऑनलाइन जर्नल प्लोस वन में प्रकाशित इस शोध में कहा गया कि 12 हफ्तों के प्रशिक्षण के बाद दोनों समूहों का परिणाम उल्लेखनीय रूप से एक जैसा था।

गिबाला कहते हैं, “ज्यादातर लोग कसरत नहीं करने का बहाना यही बनाते हैं कि उनके पास समय नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे अध्ययन का निष्कर्ष है कि कम समय में भी तेज कसरत से स्वास्थ्य संबंधी फायदा मिलता है।”

Source: ndtv

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