महिलाओं में थाइरोइड की समस्याओं के कारण और लक्षण

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थाइरोइड एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो कि गले के सामने की तरफ स्थित होती है। यह ग्रंथि शरीर की ज़्यादातर चयापचय(metabolic) क्रियाओं के लिए ज़िम्मेदार होती है। थाइरोइड हॉर्मोन्स(hormones) के असामान्य उत्पादन की वजह से थाइरोइड(Thyroid) की समस्या होती है।

थाइरोइड(Thyroid) की समस्याएं दो प्रकार की होती हैं

हाइपर थाइरॉइडिस्म (Hyperthyroidism)

यह एक ऐसी समस्या होती है, जब थाइरोइड हॉर्मोन्स का उत्पादन सामान्य से ज़्यादा होता है।

हाइपो थाइरॉइडिस्म (Hypothyroidism)

यह एक ऐसी स्थिति होती है, जब थाइरोइड हॉर्मोन्स का उत्पादन सामान्य से कम होता है।

थाइरोइड की समस्या के कारण (What causes thyroid problems?)

हाइपर थाइरॉइडिस्म के किसी भी प्रकार के अंतर्गत कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं

ग्रेव्स की बीमारी (Graves disease)

यह एक प्रतिरोधक तंत्र(autoimmune condition) की समस्या है और थाइरोइड के हॉर्मोन्स के ज़्यादा बढ़ने का मुख्य कारण है।

टॉक्सिक एडेनोमास (Toxic adenomas)

थाइरोइड की ग्रंथियों में गांठें(nodules) विकसित हो जाती हैं और थाइरोइड हॉर्मोन्स का उत्पादन करने लगती हैं, जिससे शरीर का केमिकल संतुलन खराब होता है।

सबएक्यूट थाइरॉइडाइटिस (Subacute thyroiditis)

थाइरोइड की ग्रंथियों में सूजन या जलन से अतिरिक्त हॉर्मोन्स का उत्पादन होता है, जिसके फलस्वरूप अस्थाई हाइपर थाइरॉइडिस्म (temporary hyperthyroidism)की स्थिति उत्पन होती है। यह समस्या कुछ हफ़्तों से कुछ महीनों तक भी बनी रह सकती है।

हाइपो थाइरॉइडिस्म की स्थिति में सामान्य से कम ग्रन्थियां पैदा होती हैं। इससे शरीर में शक्ति काफी कम हो जाती है, क्योंकि यह हॉर्मोन्स की ज़रुरत को पूरा करने में सक्षम साबित नहीं होती।

थाइरोइड ग्रंथियों का निकालना

थाइरोइड को ऑपरेशन (Operation)की मदद से निकाल देने या किसी कारणवश खराब हो जाने से भी हाइपो थाइरॉइडिस्म की समस्या उत्पन्न होती है।

हशिमोटोस थाइरॉइडाइटिस (Hashimoto”s thyroiditis)

प्रतिरोधक तंत्र की इस समस्या के अंतर्गत शरीर का खुद का प्रतिरोधक तंत्र(immune system) थाइरोइड की ग्रंथियों पर हमला करता है, जिसके फलस्वरूप हॉर्मोन्स के निकलने की संख्या कम हो जाती है।

  • साइनस, ठण्ड या दिल की किसी बीमारी के समय ली जाने वाली कुछ दवाइयों, जिनमें काफी ज़्यादा मात्रा में आयोडाइड(iodide) होता है, के संपर्क में आने से हाइपो थाइरॉइडिस्म की समस्या उत्पन्न होती है। ऐसी कुछ डाई(dye) हैं, जिन्हें एक्सरे(x-ray) के पहले लेने से आयोडाइड से संपर्क होता है, जिससे थाइरोइड हॉर्मोन्स का उत्पादन काफी कम होता है।
  • खाने में आयोडीन की कमी की वजह से भी हाइपो थाइरॉइडिस्म की समस्या उत्पन्न होती है। कुछ ख़ास खाद्द पदार्थ जैसे गाय के दूध तथा ब्रेड में आयोडीन की मात्रा कम होती है। घर पर प्रयुक्त होने वाले ज़्यादातर समुद्री नमक आयोडाइज़्ड(iodized) नहीं होते। प्रोसेस्ड भोजन में प्रयोग में आने वाला नमक भी आयोडाइज़्ड नहीं होता।

महिलाओं में थाइरोइड के लक्षण (Symptoms of thyroid in women)

गले में तकलीफ या सूजन (Neck discomfort/ enlargement)

गले में सूजन, नेकटाई(necktie) से परेशानी, गले में खराश या थाइरोइड ग्रंथियों का दिखना घेंघे(goiter) की निशानी है। यह एक सूजी हुई थाइरोइड ग्रंथि है, जो कि थाइरोइड(Thyroid) की बीमारी का संकेत है।

मासिक धर्म(Menstruation) या फर्टिलिटी(Fertility) में समस्या

पीरियड्स(Periods) के समय काफी दर्द होना तथा काफी मात्रा में द्रव्य निकलना हाइपो थाइरॉइडिस्म (Hypothyroidism) की, तथा हलके तथा अनियमित पीरियड्स का होना हाइपर थाइरॉइडिस्म(Hypothyroidism) की निशानी है। फर्टिलिटी का सम्बन्ध भी बिना इलाज के थाइरोइड(Thyroid) की समस्या से होता है।

पेट की समस्या (Bowel problem)

काफी गंभीर या लम्बे समय से चली आ रही कब्ज़ की समस्या हाइपो थाइरॉइडिस्म का संकेत है, वहीं दस्त या इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम(irritable bowel syndrome) हाइपर थाइरॉइडिस्म(Hypothyroidism) का सूचक है।

बाल या त्वचा में परिवर्तन (Hair/skin change)

बाल और त्वचा थाइरोइड की समस्या से सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। बालों का झड़ना थाइरोइड(Thyroid) का सबसे बड़ा संकेत है। हाइपो थाइरॉइडिस्म(Hypothyroidism) के अंतर्गत बाल काफी कमज़ोर, कठोर और रूखे हो जाते हैं और वे टूटने भी लगते हैं। ऐसी स्थिति में त्वचा भी रूखी, मोटी तथा बेजान हो जाती है।

Source: hinditips

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