गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर का ब्लड प्रेशर क्यों अधिक हो जाता है, जानिए?

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 गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर का ब्लड प्रेशर क्यों अधिक हो जाता है, जानिए?  

गर्भावस्था के दौरान एक महिला के शरीर में कई प्रकार के शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं। कुछ परिवर्तन दूसरों की तुलना में ज्यादा नुकसानदायक होते हैं। गर्भावस्‍था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या कुछ महिलाओं में ऐसे ही बड़े परिवर्तनों में से एक है। गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की संभावना उन महिलाओं में अन्य महिलाओं की तुलना में अधिक होती है जिन्हें पहले से ही हाई बीपी की समस्या होती है।

ज्यादातर मामलों में, गर्भावस्‍था के दौरान ब्लड प्रेशर ज्यादा परेशानी पैदा नहीं करता, जबकि कुछ मामलों में यह विकासशील भ्रूण और मां के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बहुत देखी जाती है। गर्भ के विकास के साथ हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति अधिक बढ़ती है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में ब्लड प्रेशर के बढ़ने को गर्भावधि उच्चरक्तचाप कहा जाता है। यह होने पर गर्भवती महिला के यूरिन में प्रोटीन नहीं रह पाता है और हाइपरटेंशन हो जाता है, इसी कारण बाद में प्रीक्लेम्पसिया की समस्या होती है। यानी गर्भावस्था के दौरान ब्लड़ प्रेशर का ज्यादा होना प्रीक्लेम्पसिया कहलाता है।

गर्भावस्था में  क्यों है चिंता का विषय हाई ब्लड प्रेशर
हाई  ब्लड प्रेशर किसी भी तरह से समस्याग्रस्‍त होता है यह तो आप जानती ही है, लेकिन क्या आप जानती है कि गर्भावस्‍था के दौरान इसका जोखिम और भी बढ़ जाता है। गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद आपको प्रीक्लेम्पसिया का अनुभव हो सकता है, जो आमतौर पर डिलीवरी के बाद अपने आप दूर हो जाता है। हालांकि यह मां के मस्तिष्क, लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही भ्रूण को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और रक्त की आपूर्ति से रोकता है। इसके अलावा कुछ महिलाओं में यह गंभीर दौरे यानी एक्लंप्षण का कारण भी बनता है।

इन लक्षणों का रखें अवशय ध्यान 
गर्भावस्था के दौरान, आपका डॉक्टर नियमित रूप से आपके ब्लड प्रेशर पर नजर रखता है। अगर आपका सिस्टोलिक दबाव 140 से अधिक और डायस्टोलिक प्रेशर 90 से अधिक हो जाता है, यह एक समस्या का संकेत हो सकता है। प्रीक्लेम्पसिया का हाई ब्‍लड प्रेशर के रूप में निदान करना उतना आसान नही है। इसलिए हाई ब्‍लड प्रेशर होने पर यह जांचने के लिए कि एक्लंप्षण है या नहीं, आपका डॉक्टर यूरीन में प्रोटीन के लक्षणों की जांच करता है। इसके साथ ही आपका डॉक्टर भ्रूण की नॉर्मल हार्ट रेट और मूवमेंट को जानने के लिए नॉन-स्‍ट्रेस टेस्‍ट करवाता है। भ्रूण के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है।

संभावित कारण
कुछ महिलाओं में हाई ब्लडप्रेशर की शिकायत गर्भावस्था के पहले से ही होती है।

गर्भवती में हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत गर्भावस्था के चलते उत्पन्न होती है।

कई बार गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप की शिकायत किडनी से संबंधित बीमारी, मोटापा, चिंता और मधुमेह आदि के कारण होती है।

गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर कई संभावित कारणों से बढ़ सकता है। इन कारणों में अस्वस्थ जीवनशैली, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी शामिल है।

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में उच्च रक्तचाप और एक्लंप्षण के जोखिम को कम करने के लिए गर्भाधारण से पहले और गर्भाधारण के दौरान बचाव के उपायों को ज़रूर अपनाना चाहिए।

Source: samacharjagat

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