Gallbladder stone पित्त की पथरी pitt ki thelee ki pathari nikaalane kaa natural प्राकृतिक upachaar

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आज बहुत से लोग इस से परेशान हैं, और डॉक्टर भी इस के आगे फेल हैं।

कृपया शेयर करते रहिये।

पहले 5 दिन रोजाना 4 ग्लास एप्पल जूस (डिब्बे वाला नहीं) और 4 या 5 सेव खायें …..

छटे दिन डिनर नां लें ….

इस छटे दिन शाम 6 बजे एक चम्मच ”सेधा नमक” ( मैग्नेश्यिम सल्फेट ) 1 ग्लास गर्म पानी के साथ लें …

शाम 8 बजे फिर एक बार एक चम्मच ” सेंधा नमक ” ( मैग्नेश्यिम सल्फेट ) 1 ग्लास गर्म पानी के साथ लें …

रात 10 बजे आधा कप जैतून ( Olive ) या तिल (sesame) का तेल – आधा कप ताजा नीम्बू रस में अच्छे से मिला कर पीयें …..

सुबह स्टूल में आपको हरे रंग के पत्थर मिलेंगे …

नोट: पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें।

पित्त की पथरी
डॉक्टर्स कहते हैं के अगर को पित्त की पथरी निकाल दे तो वह एक करोड़ रुपैये देंगे। ये दावा सिर्फ लोगो का आयुर्वेद से लोगो को भटकाने के लिए हैं। आज उनके लिए हैं ये पोस्ट, आशा करते हैं आपको फायदा होगा। और हम फिर से यही कहेंगे के जब भी आप ये प्रयोग करे तो किसी आयुर्वेद, होम्योपैथिक, या एलोपैथिक डॉक्टर के संरक्षण में करे।आयुर्वेद किसी का विरोध नहीं करता।
पित्त पथरी, पित्ताशय के अन्दर पित्त अवयवों के संघनन से बना हुआ रवाकृत जमाव होता है। इन पथरियों का निर्माण पित्ताशय के अन्दर होता है लेकिन ये केंद्र से दूर रहते हुए पित्त मार्ग के अन्य भागों में भी पहुंच सकती है जैसे पुटीय नलिका, सामान्य पित्त नलिका, अग्न्याशयीय नलिका या एम्प्युला ऑफ वेटर.
पित्ताशय में पथरी की उपस्थिति तीव्र कोलेसिसटाइटिस का कारण बन सकती है जो कि पित्ताशय में पित्त के अवरोधन के कारण होने वाली सूजन की अवस्था है और यह प्रायः आंत संबंधी सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले द्वीतियक संक्रमण का कारण भी बनता है, मुख्यतः एस्चीरिचिया कोली और बैक्टिरॉयड्स वर्गों में. पित्त मार्ग के अन्य हिस्सों में पथरी की उपस्थिति के कारण पित्त नलिकाओं में अवरोध पैदा हो सकता है जोकि एसेन्डिंग कोलैनजाइटिस या पैन्क्रियेटाइटिस जैसी गंभीर अवस्थाओं तक पहुंच सकता है। इन दोनों में से कोई भी अवस्था प्राणों के लिए घातक हो सकती है और इसलिए इन्हें चिकित्सीय आपातस्थिति के रूप में देखा जाता है।

1. Gallbladder (पित्त की थेली) की पत्थरी निकालने का प्राकृतिक उपचार:- आज बहुत से लोग इस से परेशान हैं, और डॉक्टर भी इस के आगे फेल हैं।कृपया शेयर करते रहिये।पहले 5 दिन रोजाना 4 ग्लास एप्पल जूस (डिब्बे वाला नहीं) और 4 या 5 सेव खायें.छटे दिन डिनर नां लें.इस छटे दिन शाम 6 बजे एक चम्मच’सेधा नमक’ (मैग्नेश्यिम सल्फेट) 1 ग्लास गर्म पानी के साथ लें.शाम 8 बजे फिर एक बार एक चम्मच’ सेंधा नमक’ (मैग्नेश्यिम सल्फेट) 1 ग्लास गर्म पानी के साथ लें.रात 10 बजे आधा कप जैतून (olive) या तिल (sesame) का तेल – आधा कप ताजा नीम्बू रस में अच्छे से मिला कर पीयें.सुबह स्टूल में आपको हरे रंग के पत्थर मिलेंगे.नोट: पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें।
2. सेब का जूस और सेब का सिरका (apple and apple cider vinegar)- सेब में पित्त की पथरी को गलाने का गुण होता है, लेकिन इसे जूस के रूप में सेब के सिरके के साथ लेने पर यह ज्यादा असरकारी होता है। सेब में मौजूद मैलिक एसिड (mallic acid) पथरी को गलाने में मदद करता है तथा सेब का सिरका लिवर में कोलेस्ट्रॉल नहीं बनने देता, जो पथरी बनने के लिए जिम्मेदार होता है। यह घोल न केवल पथरी को गलाता है बल्कि दोबारा बनने से भी रोकता है और दर्द से भी राहत देता है।उपचार के लिए- एक गिलास सेब के जूस में, एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं। इस जूस को रोजाना दिन भर में दो बार पीएं।

3. नाशपाती का जूस (pear juice)- नाशपाती के आकार की पित्त की थैली को नाशपाती द्वारा ही साफ किया जाना संभव है। नाशपाती में मौजूद पैक्टिन (pectene) कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) को बनने और जमने से रोकता है। यूं भी नाशपाती गुणों की खान है जिसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं।उपचार- एक गिलास गरम पानी में, एक गिलास नाशपाती का जूस और दो चम्मच शहद (honey) मिलाकर पीएं। इस जूस को एक दिन में तीन बार पीना चाहिए।

4. चुकंदर, खीरा और गाजर का जूस (beetroot, cucumber and carrot juice)- जूस थेरेपी को पित्त की थैली के इलाज के लिए घरेलू उपचारों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। चुकंदर न केवल शरीर का मजबूती देता है बल्कि गॉल ब्लेडर को साफ भी करता है साथ ही लिवर के कोलोन (colon) को भी साफ करता है। खीरा में मौजूद ज्यादा पानी की मात्रा लिवर और गॉल ब्लेडर दोनों को डिटॉक्सीफाई (detoxify) करती है। गाजर में भी विटामिन सी और उच्च पोषक तत्व (high nutrient) होने के कारण यही गुण होते हैं।उपचार- एक चुकंदर, एक खीरा और चार गाजर को लेकर जूस तैयार करें। इस जूस को प्रतिदिन दो बार पीना है। जूस में प्रत्येक सामग्री की मात्रा बराबर होनी चाहिए, इसलिए सब्जी या फल के साइज के हिसाब से मात्रा घटाई या बढ़ाई जा सकती है।

5. पुदीना (mint)– पुदीना को पाचन के लिए सबसे अच्छी घरेलू औषधि (home remedy) माना जाता है जो पित्त वाहिका तथा पाचन से संबंधित अन्य रसों को बढ़ाता है। पुदीना में तारपीन (terpenes) भी होता है जो कि पथरी को गलाने में सहायक माना जाता है। पुदीने की पत्तियों से बनी चाय गॉल ब्लेडर स्टोन से राहत दे सकती है।उपचार- पानी को गरम करें, इसमें ताजी या सूखी पुदीने के पत्तियों को उबालें। हल्का गुनगुना रहने पर पानी को छानकर इसमें शहद मिलाएं और पी लें। इस चाय को दिन में दो बार पीया जा सकता है।

6. खान-पान और दिनचर्या में बदलाव (changes in diet and daily activity)- रोजाना 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीएं। चाहे प्यास न भी लगी हो।वसायुक्त या तेज मसाले वाले खाने से बचें।प्रतिदिन कॉफी जरूर पीएं। बहुत ज्यादा भी नहीं लेकिन दिन में एक से दो कप काफी हैं। कॉफी भी पित्त वाहिका को बढ़ाती है जिससे पित्त की थैली में पथरी नहीं होती।अपने खाने में विटामिन सी की मात्रा बढाएं। दिनभर में जितना ज्यादा संभव हो विटामिन सी से भरपूर चीजें खाएं।हल्दी, सौंठ, काली मिर्च और हींग को खाने में जरूर शामिल करें।

पित्ताशय की पथरी से पीड़ित कई लोगों में किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं होते। आमतौर पर लक्षणों की शुरुआत तब होती है जब एक या अधिक पथरी आपके पित्ताशय से निकलकर पित्त नलिका में आ जाती है, जहाँ यह अटक या फंस जाती है। इसके कारण एकाएक तीव्र दर्द होता है, जिसे पित्ताशय का दर्द (बिलियरी कालिक) कहते हैं, और इसके कारण होने वाली सूजन को पित्ताशय की सूजन (कोलीसिस्टाइटिस) कहा जाता है।
पित्ताशय की पथरी के सामान्य लक्षणों में हैं:

  • आपके दाहिनी तरफ पेट के समीप हिस्से में और पीछे पीठ में एकाएक तीव्र दर्द होना जो कि कई घंटों तक बना रहता है।
  • बीमार अनुभव करना।
  • तेज बुखार, कंपकंपी और पसीना आना।
  • त्वचा और आँखों के सफ़ेद हिस्से का पीला पड़ना (पीलिया)।
  • मिट्टी के रंग का मल और चाय के रंग का मूत्र।
  • मतली और उल्टी।

कारण

पित्त की उत्पत्ति करने वाले पदार्थों में हुए असंतुलन से पित्त की पथरी का निर्माण होता है। यदि पित्त में कोलेस्ट्रॉल और बिलीरुबिन की अत्यधिक मात्रा हो या पित्त लवणों की पर्याप्त मात्रा ना हो तो पित्त की पथरी निर्मित होती है। कई कारक इकट्ठे होकर पित्त की पथरी का निर्माण कर सकते हैं, जिनमें हैं :

  • अनुवांशिकता
  • मोटापा
  • पित्ताशय में गति का घट जाना।
  • उच्च कैलोरी युक्त आहार।
  • क्लोनोर्किस या अस्कारिस जैसे परजीवी।

    पित्ताशय की पथरी क्या है?

    पित्ताशय (गालब्लैडर) आपके पेट के दाहिने हिस्से में एक छोटा, नाशपाती के आकार का अंग होता है, जो आपके लिवर के ठीक नीचे स्थित होता है। पित्ताशय में एक पाचक द्रव होता है, जिसे बाइल (पित्त) कहते हैं जो आपकी छोटी आंत में उत्सर्जित होता है। पित्ताशय की पथरी इसी द्रव के इकठ्ठा होने से बना सख्त हिस्सा है जो पित्ताशय में उत्पन्न होता है।
    पित्ताशय की पथरी का आकार रेत के कण से लेकर गोल्फ की गेंद तक का हो सकता है। पित्ताशय एक बड़े आकार की पथरी, छोटी-छोटी सैकड़ों पथरी, या छोटी और बड़ी दोनों प्रकार की पथरी उत्पन्न कर सकता है।
    पित्ताशय की पथरी के दो मुख्य प्रकार हैं:
    कोलेस्ट्रॉल की पथरी: पित्ताशय में पाए जाने वाली पथरी का 80% कोलेस्ट्रॉल की पथरी का होता है, जो कि आमतौर पर पीले-हरे रंग की होती है।
    रंगद्रव्य (पिगमेंट) की पथरी: इस प्रकार की पथरी छोटी और गहरे रंग की होती है और बिलीरुबिन से निर्मित होती हैं।

    रोग अवधि

    कभी-कभार होने वाले या मंद मामले यदि औषधियों द्वारा नियंत्रित किये जाएँ तो पथरी को सिकुड़ने में वर्षों लग सकते हैं। आमतौर पर गंभीर मामलों में शल्यक्रिया की सलाह दी जाती है और ठीक होना शल्यक्रिया के प्रकार पर निर्भर करता है।

    जाँच और परीक्षण

    रोग का निर्धारण शारीरिक परीक्षण द्वारा होता है और पित्त की पथरी या पित्ताशय की सूजन की पहचान हेतु की जाने वाली जांचों में हैं:

    • पेट का अल्ट्रासाउंड।
    • पेट का सीटी स्कैन।
    • मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई)।
    • कोलीसाइंटिग्राफी
    • एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेंजियोपेन्क्रिएटोग्राफी (ईआरसीपी)।
    • विभिन्न रक्त परीक्षण।

    डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाब

    1. पित्ताशय क्या है?
    पित्ताशय (गालब्लैडर) आपके पेट के दाहिने हिस्से में एक छोटा, नाशपाती के आकार का अंग होता है, जो आपके लिवर के ठीक नीचे स्थित होता है। पित्ताशय में एक पाचक द्रव होता है, जिसे बाइल (पित्त) कहते हैं जो आपकी छोटी आंत में उत्सर्जित होता है।

    2. पित्त की पथरी क्या है?
    पित्ताशय की पथरी इसी द्रव के इकठ्ठा होने से बना सख्त हिस्सा है जो पित्ताशय में उत्पन्न होता है। पित्ताशय की पथरी का आकार रेत के कण से लेकर गोल्फ की गेंद तक का हो सकता है। पित्ताशय एक बड़े आकार की पथरी, छोटी-छोटी सैकड़ों पथरी, या छोटी और बड़ी दोनों प्रकार की पथरी उत्पन्न कर सकता है।

    3. पित्त की पथरी कितने प्रकार की होती है?
    पित्ताशय की पथरी के दो मुख्य प्रकार हैं:
    कोलेस्ट्रॉल की पथरी: पित्ताशय में पाए जाने वाली पथरी का 80% कोलेस्ट्रॉल से बनी पथरी का होता है, जो कि आमतौर पर पीले-हरे रंग की होती है।
    रंगद्रव्य (पिगमेंट) की पथरी: इस प्रकार की पथरी छोटी और गहरे रंग की होती है और बिलीरुबिन से निर्मित होती हैं।

    4. पित्त की पथरी में कैसे लक्षण उभरते हैं?

    पित्ताशय की पथरी से पीड़ित कई लोगों में किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं होते। आमतौर पर लक्षणों की शुरुआत तब होती है जब एक या अधिक पथरी आपके पित्ताशय से निकलकर पित्त नलिका में आ जाती है, जहाँ यह अटक या फंस जाती है। इसके कारण एकाएक तीव्र दर्द होता है, जिसे पित्ताशय का दर्द (बिलियरी कालिक) कहते हैं, और इसके कारण होने वाली सूजन को पित्ताशय की सूजन (कोलीसिस्टाइटिस) कहा जाता है।

    5. इस स्थिति से पीड़ित होने पर व्यक्ति को क्या करना चाहिए?
    अपने पित्ताशय में उपस्थित पित्त को तरल अवस्था में बनाए रखने के लिए और आपको वसा पचाने और अवशोषित करने में सहायता करने के लिए प्रतिदिन छः से आठ गिलास पानी पियें। यदि आपको वजन कम करने की आवश्यकता है, तो इसे धीमे-धीमे घटाएँ (क्रेश डाइटिंग से पित्त की पथरी उत्पन्न हो सकती है)।

    6. व्यक्ति को डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए?
    व्यक्ति को चाहिए डॉक्टर से संपर्क करें यदि आप अग्रलिखित लक्षणों में से किसी का अनुभव करते हैं जैसे 38 से.ग्रे. (100) या अधिक बुखार होना, लगातार बना हुआ पेट दर्द और कंपकंपी या थरथराहट के दौरे आना। त्वचा और आँखों के सफ़ेद हिस्से का पीला पड़ना (पीलिया) के साथ खुजली वाली त्वचा और मिट्टी के रंग के मल के साथ चाय के रंग के मूत्र की उपस्थिति होने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह की आवश्यकता होती है।

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    7. यदि मैं अपनी पित्त की पथरी को निकलवाता नहीं हूँ, तो क्या होगा?
    पित्त की पथरी को अकेले छोड़ा जा सकता है, ये किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न नहीं करती। हालाँकि, यदि आपको लक्षणों का अनुभव होता है, तो आपको पथरी को निकलवाने की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि ये अधिक गंभीर समस्या तक पहुँच सकती है।

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