ऑर्गेनिक गार्डनिंग से घर की बगिया सजाएं

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रासायनिक उर्वरकों से पर्यावरण पर तो विपरीत प्रभाव पडा ही है, इनके इस्तेमाल से उगाई गई फल-सब्जियां हमारे शरीर को भी खासा नुकसान पहुंचा रहे हैं. बस, थोडी सी मेहनत और सूझबूझ से ऑर्गेनिक गार्डनिंग को अपनाया जाए तो धरती इंसान दोनों की सेहत सुधर जाएगी.

ऑर्गेनिक गार्डनिंग

ऑर्गेनिक स्वाद-

गमलों और क्यारियों में गोबर, मेंगनी की खाद, वर्मीकम्पोस्ट, लीफ मोल्ड आदि ही काम में लाएं. फास्फोरस की कमी दूर करने के लिए बोनीमील अथवा फिशमील की उचित मात्रा खाद में मिलाएं. पोटाश की पूर्ति के लिए कंडे की राख उचित मात्रा में डालें.

पलवार-

मलचिंग से खपतवार नहीं उगते और मिट्टी में नमीं बनी रहती है. साथ ही तापक्रम भी कम रहता है. इसके गलने-सडने से मिट्टी में उर्वरता की भी वृद्धि होती है.

कीट व पादप-

गमलों और क्यारियों में पानी भरा रहने से जड गलन, तना गलन और अन्य पादप रोग हो सकते हैं. गुलाब के तनों पर स्केली इंसेक्ट के लिए रूई के फाए में नीम का तेल लेकर लगाएं. पाउडरी मिल्डियू के लिए कंडे की छानी हुई राख की डस्टिंग की जा सकती है. व्हाइट फ्लाई, वायरस ग्रसित पौधों की पीली पत्तियों की ओर आकर्षित होकर उनका रस चूसती हैं और दूसरे पौधों को भी वायरस से संक्रमित कर देती है. पीले रंग के बोर्ड पर ग्रीस या वैसलीन लगाकर पौधों से थोडा ऊपर लगाने से ये व्हाइट फ्लाइज वहीं पर चिपक जाएंगी और कीटों की संख्या में कमी होगी.

लॉन के लिए-

लॉन में डीएपी व फोरेट आदि डालने की अपेक्षा नीम की खली का प्रयोग करें. फॉरेट आदि रसायन कीडों को मारने के साथ बहुउपयोगी केंचुओं को भी समाप्त कर देते हैं. बैंगन, टमाटर आदि में जड गांठ रोग (नॉट रोग) निमेटोड्स के कारण होता है. इसके नियन्त्रण के लिए फॉरेट आदि का प्रयोग न करें. इन पौधों की दो पत्तियों के बीच में बौनी प्रजाति के गेंदें के पौधों की एक कतार लगाकर निमेटोड नियन्त्रण किया जा सकता है.

जैव विविधता-

कीटनाशक रसायन के प्रयोग से लाभदायक कीट भी मर जाते हैं. जैसे लेडी बर्ड बीटल (भंृग) एफिड को अपना भोजन बनाकर उनकी संख्या कम करते हैं. इसी प्रकार ततैये विभिन्न कीटों की लट (कैटरपिलर) को अपना भोजन बनाते हैं.

बगिया में चिडियाओं को आकर्षित करने वाले पौधे भी लगाएं. फूलचूकी (सनबर्ड) फूलों से रस चूसती है. साथ ही यह पत्तियों से रस चूसने वाले कीट (एफिड) को भी बडे चाव से खाती है. इसी प्रकार गौरैया, बुलबुल, मैना आदि कुतर-कुतर कर पत्तियां खाने वाले लट (कैटरपिलर) को अपना भोजन बनाकर इन कीटों की संख्या पर नियन्त्रण करती है.

गुडाई करते समय सफेद लट (व्हाइट ग्रव) बाहर निकलने पर चिडियों के लिए नेस्ट बॉक्स लगाइए. एक पेड की डाली पर फीडिंग ट्रे लगाइए, जहां दाना डाल सकें. लॉन में एक बर्डबाथ रखिए. इससे लॉन का अलंकरण भी होगा और बगिया चिडियों के कलरव से गूंज उठेगी और आपकी बगिया भी ईको फ्रेंडली बन जाएगी.

Source: palpalindia

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