– सिंथेटिक दूध बनाने के लिए मात्र 10 ग्राम वॉशिंग पाउडर, 800 एमएल रिफाइंड तेल और मात्र 200 एमएल दूध को आपस में मिलाया जाता है.

– इसमें पानी भी मिलाया जाता है और एक लीटर दूध से 20 लीटर सिंथेटिक दूध तैयार करते हैं औऱ इसी से मावा भी तैयार हो जाता है.

– यह मावा तैयार होकर पूरे देश में यानी कोलकाता से लेकर उड़ीसा व चेन्नई तक ट्रेनों के माध्यम से जाता है.

मिलावटी मावा की मंडी है ग्वालियर

– पूरे देश में इस मावे की सप्लाई ग्वालियर से होती है. ग्वालियर का मोर बाजार इसका बड़ा ठिकाना है.

– सिंथेटिक दूध से बना मावा मात्र 150 रुपए किलो बिकता है, जबकि खालिस दूध का मावा त्योहार के सीजन में 300 रुपए किलो तक बिकता है.

होली में खपाया जाएगा 200 टन मावा

उत्तर प्रदेश से सटे मुरैना व भिंड के सीमावर्ती गांवों में सिंथेटिक मावा तैयार हो रहा है. ग्वालियर की मंडी के द्वारा पूरे देश में पहुंच रहा है. बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 200 टन से ज्यादा सिंथेटिक मावे की मिठाइयां तैयार होकर होली के बाजार में खपाई जाएंगी.

दूध उत्पादन कम, लेकिन मावा बनता है ज्यादा

अंचल में प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध का उत्पादन है, लेकिन बाजार में जितने मावा का ऑर्डर हैं, उसके लिए दूध करीब 12 से 14 लाख लीटर प्रतिदिन दूध जरूरत है. जाहिर है ज्यादा ऑर्डर की पूर्ति सिंथेटिक यानी मिलावटी मावे से की जा रही है.

ऐसे करें पहचान

नकली मावा या मिठाई की जांच के लिए टिंचर आयोडीन की पांच से सात बूंदें और पांच से सात दाने शक्कर लेकर गर्म करें. यदि मावा नकली होगा तो रंग बदल जाएगा.

ग्वालियर. ग्वालियर-चंबल के कई जिलों में मिलावटी मावा बनाने का काम होली का त्योहार आते ही तेज़ हो गया है. नकली मावा दूध में यूरिया के अलावा डिटर्जेंट पाउडर और घटिया क्वालिटी का वनस्पति घी मिलाकर बनाया जा रहा है.

Source: palpalindia

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