घुटने की समस्या को दूर करे

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घुटने की समस्या को दूर करे

जानिए कैसे कर सकते है घुटने की समस्या को दूर करे । विकसित देशों के सामने एक बार फिर भारतीय डॉक्टरों ने अपनी प्रतिभा साबित की है।

हाल में कनाडा के एक डॉक्टर ने अपने विकारग्रस्त घुटने की समस्या को दूर करने के लिए भारत में पहली बार ‘बॉयोलॉजिकल रीसर्फेसिग ऑफ नी ज्वाइंट सर्जरी’ कराने का फैसला किया।
अमेरिका और इटली सरीखे विकसित देशों में इस तरह की सर्जरी के मामले छोटे स्वरूप में हुए है, लेकिन आधे जोड़ की पूरी सतह पहली बार बदली गयी है।
 मुंबई में हाल में ही हुई इस सर्जरी के सकारात्मक नतीजे उन लोगों के लिए भी लाभप्रद साबित होंगे, जो किन्ही कारणों से घुटना प्रत्यारोपण नहीं कराना चाहते..
योलॉजिकल रीसर्फेसिग ऑफ नी ज्वाइंट सर्जरी की प्रक्रिया में घुटने की सतह पर दोबारा कार्टिलेज का निर्माण किया जाता है। इस सर्जरी को क्रियान्वित करने के लिए स्वीडन से कोलाजेन स्कैफोल्ड और अमेरिका से बॉयोटेक्नालॉजी किट्स का आयात किया गया। ये सभी सामग्रिया अमेरिका के फूड्स एन्ड ड्रग्स ए़डमिनिस्ट्रेशन से प्रमाणित थीं और मानव प्रयोग के लिए उपयुक्त थीं।
इस सर्जरी का निर्णय कनाडा के 69 वर्षीय डॉक्टर ओसवाल्ड वाचलर ने हृदय की धमनियों में आए अवरोध और जन्म से ही एक ही किडनी होने के चलते लिया था। एक अनुभवी डॉक्टर होने की वजह से ओसवाल्ड घुटना प्रत्यारोपण से बचना चाहते थे और स्वय की शारीरिक स्थितियों से जुड़े ‘रिस्क फैक्टर’ को भली-भाति समझते थे।
डॉ. ओसवाल्ड के अनुसार सर्जरी के बाद पिछले 10 दिनों में उनके घुटने का दर्द काफी हद तक कम हो चुका है और दिनोंदिन राहत का सिलसिला जारी है। हालाकि उन्हें तीन महीने तक घुटने पर पूरा वजन न डालने की सलाह दी गयी है।
इनके लिए उपयुक्त है
यह सर्जरी
‘ ऐसे रोगी जो किन्ही रोगों की वजह से घुटना प्रत्यारोपण के लिए अनुपयुक्त (अनफिट) हों।
‘ वे व्यक्ति, जो घुटना प्रत्यारोपण नहीं करवाना चाहते।
‘ कार्टिलेज इंजरी (घुटने की सतह की चोट) से ग्रस्त युवा रोगी।
‘ किसी रोग के कारण घुटने की कार्टिलेज (घुटने की सतह) के नष्ट होने के बाद।
क्या लाभ हैं इसके
‘ घुटना प्रत्यारोपण के बगैर दर्द से राहत।
‘ अस्पताल में हफ्ते भर रुकने की जरूरत नहीं।
‘ शरीर में रक्त चढ़ाने (ब्लड ट्रासफ्यूजन) की आवश्यकता नहीं।
‘ भविष्य में जरूरत पड़ने पर घुटना प्रत्यारोपण का विकल्प भी मौजूद।
भविष्य में उपयोगिता
‘ किसी भी नई सर्जरी में दीर्घकालिक परिणाम ही उसकी उपयोगिता को सिद्ध करते हैं। अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ आर्थोपेडिक सर्जन के जर्नल में बीते दिनों एक लेख प्रकाशित हुआ था। इस लेख के अनुसार इस प्रकार की सर्जरी घुटने की गभीर समस्या (जैसे अर्थराइटिस) से पीड़ित लोगों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है।
जरूरी सावधानिया
‘ तीन महीने तक जोड़ों पर पूरा वजन न डालें।
‘ विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही फिजियोथेरेपी कराएं।
‘ तीन महीने तक एक्सरे न कराएं।
‘ डॉक्टर के परामर्श से जरूरत पड़ने पर एमआरआई कराएं।
इनके लिए उपयुक्त नहीं
‘ जिन लोगों का वजन बहुत ज्यादा हो।
‘ जिनके घुटने के लिगामेंट (टिश्यूज) काफी ढीले हो गए हों।
डॉ.बी.एस.राजपूत
आर्थोपेडिक व स्टेम सेल ट्रासप्लाट सर्जन
क्रिटीकेयर हॉस्पिटल, जुहू, मुंबई
क्या है यह सर्जरी
बॉयोलॉजिकल रीसर्फेसिग ऑफ नी ज्वाइंट सर्जरी एक जटिल सर्जिकल प्रक्रिया है, जो निम्न चरणों में पूरी की जाती है
‘ ऑटोलोगस थ्रोम्बिन(रक्त का थक्का जमाने की प्रोटीन) का निर्माण।
‘ रक्त द्वारा ‘प्लेटलेट रिच प्लाज्मा’ का निर्माण।
‘ अस्थि-मज्जा (बोन मैरो) को एकत्र करना और उसे परिष्कृत करना।
‘ जोड़(ज्वाइंट)की अंदर से सफाई करना।
‘ बोन मैरो स्टेम सेल्स से भरपूर कोलाजेन सतह को जोड़ की सतह पर चिपकाना।
Source: ann24x7
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