खिचड़ी खाओ, सेहत बनाओ

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खिचड़ी खाओ, सेहत बनाओ

वैसे तो खिचड़ी को कई प्रकार से बनाया जा सकता है, लेकिन मूंग दाल की खिचड़ी एक प्रचलित व बेहद पौष्टिक व्यंजन होता है. इसे बहुत ही आसानी से और कम समय में बनाया जाता है. स्वाद ही नहीं खिचड़ी सेहत के गुणों से भी भरपूर होती है. इसलिये जब कोई बीमार हो जाता है तो डॉक्टर भी उसे सुपाच्य मूग दाल की खिचड़ी खाने की ही सलाह देते हैं. खिचड़ी पौष्टिक होने के साथ साथ बहुत ही हल्की और आसानी से पचने वाली डिश होती है.

खिचड़ी आयुर्वेदिक आहार का एक मुख्य भोजन है, क्योंकि इसमें तीन दोषों, वत्ता, पित्त और कफ को संतुलित करने की क्षमता होती है. यह क्षमता ही खिचड़ी को त्रिदोषिक आहार बनाती है. शरीर को शांत व डीटॉक्सीफाई करने के अलावा खिचड़ी की सामग्री में ऊर्जा, प्रतिरक्षा और पाचन में सुधार करने के लिए आवश्यक बुनियादी तत्वों का सही संतुलन होता है.

मूंग दाल खिचड़ी के बारे में कौन नहीं जानता है क्योंकि आमतौर पर लोग इसको बुखार होने पर या पेट खराब होने पर खाते हैं. आज भी मुझे माँ के हाथ की बनी मूंग दाल की खिचड़ी का स्वाद याद है. लेकिन इसको आप बीमार होने पर ही नहीं किसी भी वक्त खा सकते हैं. इसको बनाना जितना आसान है उतना ही यह पौष्टिकता से भरपूर होता है. मूंग दाल फाइबर से भरपूर होने के कारण इसको खाने के बाद भूख देर से लगती है. अगर आपको कुछ भी खाने का मन नहीं कर रहा है तो फटाफट टेस्टी मूंग दाल की खिचड़ी बनायें और पेट भर कर खायें.

चावल और मूंग दाल की खिचड़ी खाने से दिमाग का विकास होता है और साथ ही यह खिचड़ी शक्तिवर्धक भी होती है. इसलिए अब आप हफ्ते में एक बार तो खिचड़ी खा लीजिएगा.

Source: newstracklive

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