जी मचलने के घरेलू उपचार

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Jee Ghabrane Ka Gharelu Upchar in Hindi

1. जीरा एवं शहद (Cumin and Honey for Nausea)

जीरा पाचन सुधारने के लिए एक बहुत शक्तिशाली एजेंट है। शहद पेट के संक्रमण से छुटकारा दिलाता है, जिससे उल्टी व जी मिचलाने की शिकायत रहती है।

उपयोग के लिए टिप: एक बड़ा चम्मच जीरा ले, एवं उसे पीसकर पाउडर बना लें। इसे एक चम्मच शहद में मिलाएँ। तुरन्त राहत के लिए दिन में तीन बार इसे खाएँ। यदि बार-बार उल्टी आ रही हो, तो हर तीन घण्टे में इस मिश्रण को लेना पड़ेगा। यह बात ध्यान रहे कि इसका छः बार से अधिक प्रयोग करने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

2. अदरक, इलायची, तुलसी एवं सौंफ का मिश्रण (Ginger, Cardamom, Basil and Fennel for Nausea)

जब इन मसालों को मिलाया जाता है, तो उल्टी व मिचली से तत्काल राहत मिलती है।

उपयोग के लिए टिप: एक गिलास पानी को उबालें, व उसमें कुछ टुकड़े अदरक के, एक इलायची, कुछ तुलसी के पत्ते और थोड़ी सी सौंफ डालें। जब तक पानी का रंग न बदल जाएं, तब तक इन्हें उबालें। अब गैस बंद करें, एवं इसे ठण्डा होने दें। दिन में तीन बार इसका प्रयोग करें।

3. नींबू का रस (Lemon Juice for Nausea)

उल्टी एवं मिचली के लिए नींबू एक अद्भूत प्राकृतिक दवा है। आवश्यक विटामिन जो शरीर से निकल जाते है। नींबू का रस उनकी पूर्ति करता है, एवं पाचन क्रिया बढ़ाता है। नींबू के रस की साइट्रिक गंध से मिचली से राहत मिलती है।

उपयोग के लिए टिप:

टिप 1 – नींबू का एक छोटा टुकड़ा काटें एवं निचोड़े, जिससे थोड़ा रस निकल जाएं। अब इस टुकड़े पर थोड़ा नमक डालें। अब इसे चूसें, काफी राहत मिलेगी।

टिप 2 – दूसरा प्रभावी उपचार यह है कि उबलते पानी में नींबू का छिलका, इलायची, तुलसी पत्ते और सौंफ मिलाएँ। इस मिश्रण को दिन में तीन बार पीएं। मिचली से काफी राहत मिलेगी।

4. लौंग एवं शहद (Clove and Honey for Nausea)

लौंग में चेतनाशून्य करने का गुण होता है, जो पेट में गड़बड़ की वजह से उल्टी को रोकता है। लौंग व शहद में जीवाणुरोधी गुण भी होते हैं, जो बैक्टीरियाँ से होने वाले संक्रमण से लड़ते है, एवं पाचन में सुधार होता है।

उपयोग के लिए टिप: कुछ सूखे हुए लौंग को सेक कर पाउडर बना लें एवं उसे एक चम्मच शहद में मिलाएं। उल्टी रोकने के लिए इस मिश्रण (शहद व लौंग पाउडर) को धीरे-धीरे चाटते रहें।

5. करी पत्ते (Curry Patta for Nausea)

आयुर्वेद के मूल्यों के अनुसार करी पत्ते न सिर्फ पेट की अवाँछनीय अशुद्धियों से छुटकारा दिलाता है, बल्कि विषाक्त अपशिष्टों को बाहर निकाल शरीर के पित्त स्तर को संतुलित बनाता है। यह सभी गुण एक उत्तम चिकित्सा है – मिचली व उल्टी हेतु।

उपयोग का तरीका: कुछ करी पत्तों को मसल कर उसका रस निकालें। थोड़ा नींबू का रस एवं शक्कर मिलाएँ। इस एक चम्मच जितने मिश्रण को तब-तब उपयोग में लें, जब जी मिचलाएं ।

6. पुदीने की पत्तियाँ (Mint Leaves for Nausea)

पुदीने में उपस्थित मेंथॉल पेट की कोमल माँसपेशियों पर असर करता है, एवं पाचन एंजाइमों की संख्या को बढ़ाकर पाचन क्रिया में सुधार लाता है। इससे मिचली एवं उल्टी से राहत मिलती है।

उपयोग का तरीका: कुछ ताजे पुदीने की पत्तियों को घिसकर उबलते हुए पानी में डालें। इसमें थोड़ा शहद मिलाएँ। इस काढ़े को दिन में तीन बार थोड़ा – थोड़ा पीएँ।

Source: healthindian

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