जब अम्ल और क्षार का असंतुल हो जाता शरीर में तो फिर ये हार्ट अटैक जैसे जानलेवा रोग हो सकते है

Loading...

जब दिल तक खून पहुंचने में कोई दिक्कत होती है, तब दिल का दौरा पड़ने की आशंका रहती है।दिल का दौरा(हार्ट अटैक) जैसी दिल की बीमारी का इलाज समय पर करवाना चाहिए नहीं तो यह जानलेवा साबित हो सकती है।

दोस्तों हमारे शारीर में दो तरह के तत्व होते है एक अम्ल और दूसरा क्षार यदि इन दोनों का संतुलन बिगड़ जाए तो हमारे शारीर में रोग उत्पन्न होने लगते हैं अगर हमारे शरीर में अम्ल की मात्र अधिक हो जाए तो यह खून को गाढा बना देती है और अगर खून गाढ़ा हो जाए तो यह गाढ़ा खून दिल की नसों से नही गुजर पाता और इसी अवस्था को हार्ट अटैक यानि दिल का दौरा पड़ना कहते हैं

हार्ट अटैक का इलाज मँहगा होता है, जिस वजह से आम आदमी इसके खर्चे आसानी से नहीं उठा सकता है। इसलिए ऐसी परिस्थिति में इस दिल की बीमारी का जानलेवा होना लाज़मी है। आपको पता होना चाहिए कि दिल का दौरा पड़ने पर बचाव के लिए क्या उपाय होते हैं? हार्ट अटैक के लिए भी घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय मौजूद हैं, जिनसे इसका इलाज संभव है।

हार्ट अटैक के लक्षण

सांस फूलना, ज़्यादा पसीना बहना, सीने में दर्द या जलन होना, जी मिचलाना और उल्टी आना, सिर चकराना और बेहोशी, घबराहट महसूस होना, पेट में दर्द होना, हार्ट

अटैक के कारण

हाई ब्लडप्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल,मोटापा, शरीर से काम न लेना, डायबिटीज, अनुवांशिक कारण

बचने के आयुर्वेदिक इलाज

योग, आयुर्वेद और घरेलू नुस्खे की सहायता से बिना एंजियोप्लास्टी के लगभग 80% हार्ट अटैक की संभावना को टाला जाता है। इन तरीकों से दिल की दूसरी बीमारियां भी कम हो जाती हैं। दिल का दौरा रोकने के लिए आयुर्वेद में प्रभावी उपायों का उल्लेख किया गया है।हार्ट ब्लॉकेज खोलने के लिए चिकनाई से पैदा होने वाले एसिड को खत्म किया जाता है, जिससे दिल की बीमारियां जड़ से खत्म हो जाती हैं। दिल का बीमारियां एसिडिटी के कारण होती हैं। एसिडिटी जो पेट से जुड़ी समस्या है, जब यह अधिक बढ़ जाती है तो यह एसिड खून में मिल जाता है। जिससे ब्लड एसिडिटी हो जाती है।

जब यह एसिडिक ब्लड रक्त वाहिनियों में आगे नहीं बह पाता है, तब ब्लॉकेज की समस्या हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक पड़ता है।

हार्ट अटैक का आयुर्वेदिक इलाज करने के लिए ब्लड एसिडिटी को क्षारीय वस्तुएं खाने की सलाह दी जाती है। क्षारीय खाद्य वस्तुएं खाने से खून की अम्लता घट जाती है और ब्लॉकेज खुल जाता है।

लौकी एक क्षारीय सब्ज़ी है। लौकी सब्ज़ी, लौकी का रस या कच्ची लौकी खाने से रक्त की अम्लता कम होती है। कड़वी या कसैली लौकी का सेवन नहीं करना चाहिए।

तुलसी की पत्ती में भी क्षारीय गुण होते हैं, जिसे लौकी के जूस में मिलाकर पिया जा सकता है।

लौकी और तुलसी के साथ-साथ पुदीना भी क्षारीय गुणों से युक्त है। आप लौकी के जूस में तुलसी और पुदीना मिलाकर अधिक लाभ ले सकते हैं। स्वाद के लिए सेंधा नमक डालकर पीने से कोई हानि नहीं है।

दिल की बीमारियों के लिए योगासन

दिल की अनेक बीमारियों का इलाज नियमित योग और प्राणायाम द्वारा भी संभव है। आगे बताए गए 5 प्राणायाम हार्ट प्रॉब्लम के लिए लाभकारी हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम
कपालभाती प्राणायाम
अनुलोम-विलोम प्राणायाम
भ्रमरी प्राणायाम
उदगीथ प्राणायाम

हृदयाघात के लिए आयुर्वेदिक दवाएं

दिव्य अर्जुन क्वाथ 4-4 चम्म्च खाने के बाद पिएं
दिव्य हृदयामृत 2-2 गोली सुबह-शाम खाएं
5 ग्राम दिव्य संगेयासव पिश्ती, 5 ग्राम दिव्य अकीक पिश्ती, 4 ग्राम दिव्य मुक्ता पिस्ती और 2 ग्राम योगेंदर रस मिलाकर मिश्रण बना लें। 60 पुड़िया बनाकर रख लें और सुबह-शाम खाली पेट शहद के साथ 1-1 पुड़िया का सेवन करें। जब दिल की बीमारी घातक हो तो यह उपाय कारगर सिद्ध होता है।

एक्यूप्रेशर से हार्ट अटैक का इलाज

हाथ सबसे छोटी उंगली के नीचे गहरी रेखा के ऊपर दबाने से सभी प्रकार के हृदय रोग जैसे छाती में संक्रमण, दिल का दर्द, हृदयाघात, धड़कन बढ़ जाना, हार्ट ब्लॉकेज और कार्डियोवस्कुलर डिसीज में फायदा मिलता है।

हार्ट अटैक से बचने के घरेलू उपाय

हृदयाघात और दिल की बिमारियां हर साल लाखों लोगों के लिए जानलेवा साबित होती हैं। रोज़मर्रा के जीवन में कुछ घरेलू उपाय करके दिल की बीमारियों से बचे रह सकते हैं और संभव इलाज भी कर सकते हैं।

अर्जुन छाल दिल की सभी बिमारियों में लाभकारी है। अर्जुन छाल की चाय पीने से बहुत फायदा मिलता है।

नियमित दलिया खाने से दिल की बिमारियों का खतरा कम हो जाता है।

शहद दिल की सेहत का ख़याल रखने के लिए उत्तम औषधि है। रोज़ 1 चम्मच शहद ज़रूर खाएं।

सूखा आंवाला और मिसरी को बराबर मात्रा में पीसकर हर रोज़ पानी से साथ 1 चम्मच सेवन करने से हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है।

खाना बनाने के लिए अलसी के तेल का प्रयोग करें। अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जिससे दिल को ताक़त मिलती है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए गुड़ में घी मिलाकर खाना चाहिए।

अलसी के पत्ते और सूखे धनिया का काढ़ा बनाकर पीने से भी दिल की कमज़ोरी दूर होती है

विडियो देखें >>


Source

Loading...

Please Share! Sharing is Caring!

Loading...

Next post:

Previous post: