बदलती लाइफ स्टाइल की देन है यह बीमारी

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अनेक बीमारियों की एक बीमारी है उच्च रक्तचाप अथवा हाइपरटेंशन। इसके कारण ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा भी रहता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सिस्टोलिक और डिस्टोलिक-दोनों तरह के उच्च रक्त चाप ब्रेन स्ट्रोक पैदा करते हैं और जितना अधिक उच्च रक्तचाप बना रहेगा, उतना ही अधिक ब्रेन स्ट्रोक होने की आशंका रहेगी।

मूक हत्यारा के रूप में जाना जाने वाली हाइपरटेंशन किडनी, हार्ट, ब्लड वेसेल्स और ब्रेन की गंभीर बीमारियों का कारण है। बिगड़ती जीवन शैली, बेतरतीब खानपान, ध्रूमपान और शराब के सेवन तथा काम-काज के बढ़ते दवाब की वजह से पिछले कुछ समय में हाइपरटेंशन की समस्या बढ़ी है। हाइपरटेंशन लाइफ स्टाइल की देन है। हाइपरटेंशन के खतरों के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के उद्देश्य से हर साल 17 मई को दुनिया भर में विश्व हाइपरटेंशन दिवस मनाया जाता है।

एक अनुमान के अनुसार हर पांचवा व्यक्ति हाइपरटेंशन की समस्या से जूझ रहा है। भारत में लगभग 14 करोड़ लोग इसके शिकार हैं। आंकडों के मुताबिक दुनिया भर में हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या का 15 फीसदी है। दुःख की बात तो यह है कि ज्यादातर मामलों में इसका कोई लक्षण सामने नहीं आता। यह किडनी, हार्ट, ब्लड वेसेल्स और ब्रेन डैमेज करता रहता है। कई मामलों में इसका पता तब चलता है, जब व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ जाता है या गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं।

फोर्टिस अस्पताल ( नोएडा) के वरिष्ठ न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन डॉ. राहुल गुप्ता बताते हैं कि अनेक वैज्ञानिक अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि हाइपरटेंशन के कारण ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा दोगुना हो जाता है। सिस्टोलिक रक्त चाप में हर 10 एमएम हीमोग्राम बढ़ने से इस्कीमिक स्ट्रोक का खतरा 28 प्रतिशत तथा हैमेरेजिक स्ट्रोक का खतरा 38 प्रतिशत बढ़ता है।

हालांकि अच्छी बात यह है कि अगर आप उच्च रक्त चाप पर नियंत्रण रखते हैं तो आपको स्ट्रोक होने का खतरा घट जाता है। अगर आप अपना सिस्टोलिक रक्त चाप 10 एमएम हीमोग्राम से घटा लेते हैं तो आप स्ट्रोक होने का खतरा 44 प्रतिशत तक घटा लेते हैं।

राहुल की सलाह है कि ब्रेन अटैक से बचने के लिये रक्तचाप पर नियंत्रण रखना चाहिए, मोटापा, धूम्रपान और शराब सेवन से बचना चाहिय। बेहतर तो यही है कि 40 साल से अधिक उम्र के लोग  नियमित तौर पर अपने रक्त चाप की जांच करायें, क्योंकि रक्त चाप नियंत्रित रहने से ब्रेन अटैक की आशंका कम रहती है। मधुमेह, उच्च रक्त चाप, अधिक कालेस्ट्रोल और ब्रेन स्ट्रोक आनुवांशिक कारणों से भी होते हैं, इसलिये जिन परिवारों में इन रोगों का इतिहास रहा हो उस परिवार के सदस्यों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है।

अगर उच्च रक्त चाप के साथ-साथ तनाव भी हो तो स्ट्रोक का खतरा और अधिक बढ़ जाता हैं। मनोचिकित्सक एवं नई दिल्ली स्थित कास्मोस इंस्टीच्यूट आफ मेंटल हेल्थ एंड बिहैवियरल साइंसेज के निदेशक डॉ. सुनील मित्तल कहते हैं कि स्ट्रोक का एक अन्य कारण भावनात्मक तनाव है। यदि किसी व्यक्ति को उच्च रक्तचाप की समस्या है और उसे तनाव रहता है तो उसका रक्तचाप बढ़ेगा और ब्रेन वेसल्स अधिक वृद्धि का सामना नहीं कर पाएगी और वह या तो फट जाएगी या मस्तिष्क की धमनी में रुकावट पैदा होगी।

मित्तल बताते हैं कि हाइपरटेंशन से ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है। इससे वैस्कुलर डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है। हाइपरटेंशन के कारण कॉगनिटिव क्षमता में कमी, वैस्कुलर डिमेंशिया एवं यहां तक कि अल्जाइमर भी हो सकता है। आज के समय में युवाओं में तनाव, प्रतिस्पर्धा की भावना और डिप्रेशन की समस्या बढ़ रही है और इसके कारण भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ रहा है। लंबे समय तक कायम रहने वाला तनाव तथा निगेटिविटी व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक कारक हैं।

Source: navodayatimes

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