जानिए रसगुल्ले से जुड़ी अनसुनी बाते

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रसगुल्ले का इंवेंशन बंगाल में हुआ या ओडिशा में, इसको लेकर पुरानी बहस है। लेकिन बंगाल के लोग नॉबिन चंद्र दास को ही ‘रसगुल्ले का जनक’ कहते हैं। आेडिशा में इस मिठाई को पहाला के नाम से बनाया जाता है जिसे गर्मागर्म ही सर्व करते हैं। जानते हैं रसगुल्ले के बारे में ऐसे ही फैक्ट्स:

1. बंगाल का दावा है की रसगुल्ले का इन्वेंशन उनके राज्य में हुआ। नॉबिन चन्द्र दास ने सबसे पहले रसगुल्ले बनाये थे।

 2. बंगाल में 18 वीं सदी के दौरान डच और पुर्तगालियों ने छैने से मिठाई बनाना सिखाया था। तभी से रसगुल्ले बंगाल में बनाए जाने लगे।

3. 1868 में नॉबिन चन्द्र दास ने रसगुल्ले को ज्यादा दिनों तक ताजा रखने का तरीका खोजा, ताकि इसके जल्द खराब होने का डर न रहे।

4. नॉबिन चन्द्र दास ने ही रसगुल्ले के विकल्प के तौर पर संदेश बनाया था।

5. नॉबिन चन्द्र दास के बेटे के. सी. दास ने रसगुल्ले को कैन में बेचना शुरू किया।

6. ओडिशा का दावा है कि 11 वीं सदी में पुरी में यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ ने देवी लक्ष्मी को मनाने के लिए रसगुल्ला पेश किया था। इसलिए रसगुल्ला ओडिशा की देन है।

7. माऊण्टबेटन की पत्नी एडविना माऊण्टबेटन को रसगुल्ले काफी पसंद थे।

8. रसगुल्ले को वेरिएशन के साथ ओडिशा में पहाला के रूप में बनाया जाता है, जिसे गर्मागर्म सर्व करते है।

9. रसगुल्ले को बंगाल में खीरमोहन भी कहते है। इसे नेपाल में रसभरी कहा जाता है।

10. ओडिशा और बंगाल में गुड़ से भी रसगुल्ले बनाए जाते हैं।

Source: ajabgjab

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