पढ़ें – कैसे होता है डेंगू, बचाव के 10 उपाय

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यह सच है कि डेंगू का मच्छर दिन के उजाले में घरों के अंदर या बाहर काटता है, लेकिन अगर रात में रोशनी जल रही हो तब भी ये मच्छर काट सकते हैं। बचाव के लिए मच्छर प्रतिरोधक का इस्तेमाल करें। बचाव के लिए पूरी बाजू की कमीज और पायजामा या पैंट पहनें।यह भी ध्यान रखें कि खिड़कियों के पर्दे सुरक्षित हों और उनमें छेद न हों। एयर कंडीशंड कमरों में रहकर बीमारी से बचा जा सकता है। डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस बीमारी से बचने के लिए मच्छरों को अंडे देने से रोकने के लिए घर में पानी जमा होने से रोकना चाहिए। बाहर रखे साफ पानी के बर्तनों जैसे पालतू जानवरों के पानी के बर्तन, बगीचों में पानी देने वाले बर्तन और पानी जमा करने वाले टैंक इत्यिादि को साफ रखें।

पढ़ें: कैसे होता है डेंगू, बचाव के 10 उपाय

यह सच है कि डेंगू का मच्छर दिन के उजाले में घरों के अंदर या बाहर काटता है, लेकिन अगर रात में रोशनी जल रही हो तब भी ये मच्छर काट सकते हैं।

घर के अंदर फूलदानों में पानी जमा न होने दें और उन्हें हफ्ते में एक बार जरूर साफ करें।

जिन लोगों के घर में कोई डेंगू से पीड़ित है, वह थोड़ा ज्यादा ध्यान रखें कि मच्छर दूसरे सदस्यों को न काटे। बीमारी को फैलने से बचाने के लिए पीड़ित को मच्छरदानी के अंदर सोना चाहिए। अस्पतालों को भी चाहिए कि वे डेंगू के मरीजों को मच्छरदानी उपलब्ध करवाएं।

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और आईएमए के ऑनरेरी सेक्रेटरी जनरल डॉ. के.के. अग्रवाल बताते हैं, “बहुत से लोगों को नहीं पता कि डेंगू का मच्छर गंदी नालियों में नहीं बल्कि साफ सुथरे पानी में पनपते हैं। साफ सुथरे शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है। बचाव इलाज से हमेशा बेहतर रहता है। अगर आप को डेंगू हो जाए तो घबराएं नहीं, भरपूर मात्रा में तरल आहार लें, क्योंकि डिहाइड्रेशन से ही बीमारी खतरनाक होती है और अगर डेंगू के मरीज का प्लेटलेट्स काउंट 10,000 से ज्यादा हो तो प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती। बल्कि बेवजह प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन नुकसान कर सकता है।

डेंगू बुखार मच्छरों के काटने से होने वाली एक दर्दनाक बीमारी है। यह चार किस्मों के डेंगू वायरस के संक्रमण से होती है, जो मादा एडीस मच्छर के काटने से फैलता है। डेंगू में तेज बुखार के साथ नाक बहना, खांसी, आखों के पीछे दर्द, जोड़ों के दर्द और त्वचा पर हल्के रैश होते हैं। हालांकि कुछ लोगों में लाल और सफेद निशानों के साथ पेट खराब, जी मिचलाना, उल्टी आदि हो सकता है। चूंकि यह एक वायरस से होता है इसलिए इसकी कोई दवा या एंटीबायटिक नहीं है, इसका इलाज इसके लक्ष्णों का इलाज करके ही किया जाता है। तेज बुखार बीमारी के पहले से दूसरे हफ्ते तक रहता है।

 

उचित मच्छर प्रतिरोधक का प्रयोग करके और अन्य उपास करके मच्छरों से बचा जा सकता है। घर में मच्छरों के पनपने को रोकना चाहिए। पढ़ें- मच्छरों से बचने के उपाय-

 

1-बारिश का पानी निकालने वाली नालियों, पुराने टायरों, बाल्टियों, प्लास्टिक कवर, खिलौनों और अन्य जगह पर पानी रुकने न दें।

2– फव्वारों, पक्षियों के बर्तनों, गमलों  इत्यादि से हफ्ते में एक बार पानी बदल दें।

3– अस्थायी पूल्ज को खाली कर दें या उनमें मिट्टी भर दें।

4- स्विमिंग पूल का पानी बदलते रहें और उसे चलता रखें।

5– दीवारों, दरवाजों और खिड़कियों की दरारों को भर दें।

6-दरवाजों और खिड़कियों की अच्छे से जांच कर लें।

7- बच्चें को सुलाने वाले कैरियर और अन्य बिस्तर को मच्छरदानी से ढक दें।

8- लंबी बाजू की शर्ट, पैंट और जुराबें पहनकर मच्छरों के कटने से बचें।

9– टीशर्ट को अपनी पैंट और पैंट को जुराबों में डाल कर रखें, ताकि खाली जगह से मच्छर काट न सकें।

10- सूर्य उदय और अस्त के समय व शाम को घर के अंदर रहें, क्योंकि मच्छर इस वक्त ज्यादा सक्रिय होते हैं।

Source: ibnlive

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