आज कितना पानी पिया?

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डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी होना। अक्सर इसे गर्मियों की समस्या माना जाता है, पर सच यह है कि सर्दियों में भी लोग इसके शिकार होते हैं। इससे न सिर्फ ठंड अधिक लगती है, थकान, सिर दर्द व  मांसपेशियों में भी ऐंठन रहती है।

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कुछ लोगों को प्यास नहीं लगती तो कुछ को पानी पीना ही पसंद नहीं है। खासकर ठंड में तो अक्सर लोग यह कहते हुए मिलते हैं, ‘पानी पिया ही नहीं जाता’ आदि। अगर यह शिकायत आपकी भी है, तो सावधान हो जाएं। डिहाइड्रेशन की समस्या सर्दियों में भी परेशान कर सकती है। एक ओर मौसम ठंडा होने के कारण प्यास कम लगती है तो दूसरी ओर पसीना भी कम आता है।  कम मात्रा में पानी पीना और अधिक मात्रा में चाय और कॉफी का सेवन करना डिहाइड्रेशन की आशंका को बढ़ा देता है। देर तक रूम हीटर में बैठे रहना भी शरीर की नमी को कम करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों के मौसम में सांस लेने पर काफी मात्रा में रेसपिरेटरी फ्लुइड का नुकसान होता है। बाहर के मौसम के अनुरूप शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए भी शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे पानी की कमी होने लगती है। शरीर में पानी की कमी होने पर मुंह सूखना, त्वचा मुरझाना, होंठ फटना, थकावट महसूस होना, पेशाब कम व पीला आना और चक्कर आना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

क्यों जरूरी है भरपूर पानी पीना
हमारे शरीर में दो-तिहाई पानी होता है, अगर इसमें 1.5 % की कमी आ जाती है तो इसे माइल्ड डिहाइड्रेशन कहते हैं। पानी के स्तर में 3-8 % की कमी आने पर शरीर की कार्यप्रणाली और दूसरे अंगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है।
मुंह से दुर्गंध आना: लार में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। जब शरीर में पानी की कमी होती है तो मुंह में लार की मात्रा कम हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और मुंह से दुर्गंध आने लगती है।

अधिक मीठा खाना: शरीर में पानी का स्तर कम होने पर हम भूख का अनुभव अधिक करते हैं। जिससे मीठा या कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजें खाने की इच्छा अधिक होने लगती है।

त्वचा का रूखा और बेजान होना : शरीर में पानी की कमी त्वचा को रूखा व बेजान बनाती है, जिससे बालों की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।

एकाग्रता कम होना:  पानी की कमी मानसिक क्रियाशीलता पर भी असर डालती है। एकाग्रता भंग होती है और बेचैनी बढ़ने लगती  है। इसकी वजह है पानी की कमी के कारण शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन का न पहुंचना। पानी की कमी से सिरदर्द और चिड़चिड़ापन भी होता है।

थकान होना: पानी की कमी से रक्तदाब कम हो जाता है। दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है और थकावट महसूस होने लगती है।

मांसपेशियों में ऐंठन आना:  शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर नाजुक अंगों की सुरक्षा के लिए जरूरी फ्लुइड का इस्तेमाल करने लगता है। इससे मांसपेशियों की ओर रक्त संचरण कम होता है और उनमें ऐंठन आने लगती है। कमर व पीठ दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव व डिस्क समस्या को पानी की कमी और बढ़ा देती है।

कब्ज होना : अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, तो शरीर पानी की उस कमी को मल से पूरा करता है। जिससे मल कड़ा हो जाता है और कब्ज की शिकायत रहने लगती है।

पानी की मात्रा का मतलब
सेहत विशेषज्ञ जब अधिक पानी पीने को कहते हैं तो इसका मतलब हर चीज के जरिए मिलने वाले पानी से होता है। सब्जी से लेकर फल तक हर चीज में पानी होता है। फल, सब्जियां, दूध, ग्रीन टी व जूस से भी शरीर को पानी मिलता है। अगर आप अधिक पानी नहीं पीते हैं तो ऐसी चीजें खाएं, जिनमें पानी अधिक होता है।

यूं बचें डिहाइड्रेशन से
‘अगर आप कैफीनयुक्त चीजें जैसे चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स अधिक पीते हैं तो पानी अधिक मात्रा में पीना जरूरी हो जाता है।
‘घर या ऑफिस जहां भी आप काम कर रहे हों अपने पास पानी की बोतल अवश्य रखें। कुछ समय के अंतराल पर पानी पीते रहें।
‘सादा पानी पीना कम पसंद है तो नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ या सूप अधिक मात्रा में लें।
‘अधिक तले-भुने व प्रोसेस्ड स्नैक्स में पानी की मात्रा कम होती है। अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में फल, दही, लस्सी या मिल्क शेक को जगह दें।

‘खाने के साथ सलाद व दही जरूर खाएं।  
‘ मूली, टमाटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी, पालक, स्ट्राबेरीज, ब्रोकली  अंगूर, तरबूज, लौकी, तोरई,  संतरा व सेब में अन्य फल व सब्जियों की तुलना में पानी अधिक होता है। इन्हें भरपूर खाएं।

बढ़ जाता है हृदय रोगों का खतरा
शरीर में पानी की कमी होने पर खून गाढ़ा होने लगता है। खून का प्रवाह प्रभावित होता है। रक्त व ऑक्सीजन के शरीर के सभी अंगों तक पहुंचने में समस्या होने के कारण  रक्तदाब बढ़ने लगता है। इससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर  बढ़ जाता है। खासकर कृत्रिम हार्ट वाल्व लगवा चुके या एंजियोप्लास्टी करवाने वाले जिन लोगों में धातु निर्मित स्टेंट लगा होता है, उनके लिए शरीर में पानी की कमी हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। पानी की कमी होने पर गाढ़ा रक्त हृदय स्नायुओं से चिपकने लगता है, जिससे स्टेंट अवरूद्ध हो सकता है। यही वजह है कि हृदय रोगियों के लिए सर्दियांे में भी पानी पीते रहना  बेहद जरूरी है।

ध्यान रखें
03 सप्ताह तक हमारा शरीर बिना भोजन के जीवित रह सकता है।
03 दिन तक पानी ना पीने पर शरीर में कई तरह की परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं।
1.5 लीटर के करीब पानी प्रतिदिन मल, मूत्र व पसीने के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।
01 घंटे का अंतर रखें, भोजन करने के बाद, पानी पीने में। इससे शरीर पोषक तत्वों को ढंग से ग्रहण कर पाता है।

10 % शारीरिक शक्ति कम हो जाती है शरीर में 2 % पानी की कमी होने पर।

92 % पानी होता है खून में, 75% मांसपेशियों में और 22% हड्डियों में। शरीर में पानी की कमी होने पर इन सभी अंगों पर विपरीत असर पड़ने लगता है।
38-45 लीटर पानी होता है एक महिला के शरीर में

42-48 लीटर पानी होता है एक पुरुष के शरीर में

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