एनरजेटिक रहना है तो रोज खाइए डार्क चॉकलेट

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Dark Chochlateआमतौर पर धारणा  है कि चॉकलेट्स का सेवन स्‍वास्‍थ के लिए फायदेमंद नहीं होता है। ज्‍यादा चॉकलेट्स खाने पर दांतों को नुकसान पहुंचता है। साधारण चॉकलेट्स का अधिक उपयोग करने पर शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है। लेकिन साधारण  चॉकलेट की तुलना में  डार्क चॉकलेट ज्‍यादा फायदेमंद होते हैं। इसमें ऐसे तत्व होते हैं, जो हमें एनरजेटिक बनाते हैं। एंटी ऑक्सीडेंट के कारण एेसे चॉकलेट का सेवन करने वाले खुद को  फुर्तीला महसूस करते हैं।डार्क चॉकलेट में शुगर भी कम होता है। किंगस्टन यूनिवर्सिटी में हुई स्टडी में इसके फायदों  के बारे में पता चला है।

डार्क चॉकलेट्स में एक खास तत्‍व एपिकैपचिन पाया जाता है, जिससे व्यक्ति की सक्रियता बढ़ जाती है।  किंगस्टन यूनिवर्सिटी में हुई स्टडी में चॉकलेट्स के ह्यूमन बॉडी पर प्रभाव को जांचा गया। इसमें पाया गया कि मसल्स के सेल्स ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, जिससे इंसान को अधिक एनर्जी मिलती है । डार्क चॉकलेट्स से वेन और ऑट्रीज में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो जाता है। इसके साथ ही डार्क चॉकलेट्स से ऑक्‍सीजन का बहाव भी अच्‍छा हो जाता है जो स्‍वास्‍थ के लिए फायदेमंद होता है।

हालांकि सही मात्रा में उपोग करने से ही फायदा होता है।40 ग्राम डार्क चॉकलेट्स एक आइडियल मात्रा है। दो खिलाडि़यों पर किए गए दो वीक तक के स्‍टडी में पाया गया कि जिसने डार्क चॉकलेट लिया उसके एनर्जी लेवल में काफी इजाफा हुआ, वहीं व्हाइट चॉकलेट खाने वाले के एनर्जी लेवल में कोई खास फर्क नहीं पड़ा। डार्क चॉकलेट का इस्‍तेमाल करने वाले खिलाड़ी ने स्‍वीकार किया की वह पहले से एनरजेटिक महसूस कर रहा है।

चॉकलेट को मीठा और खाने की चीज बनाने का श्रेय यूरोप को जाता है, जिसने चॉकलेट में दूध और शक्कर का समावेश किया। चॉकलेट की सामग्री कोको के पेड़ की खोज 2000 वर्ष पूर्व अमरीका के वर्षा जंगल में की गई थी।1528 में स्पेन ने जब मैक्सिको पर कब्जा कर भारी मात्रा में कोको के बीजों और चॉकलेट बनाने के यंत्रों को अपने साथ स्पेन ले गया। 1606 तक इटली, 1615 में फ्रांस और 1650 तक इंग्लैंड में चॉकलेट का इस्‍तेमाल पेय के रुप में होता था।

Source: indiatrendingnow

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