चुनें अपने लिए सही दूध

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दूध को प्राचीन समय से ही सर्वोत्तम आहार माना जाता रहा है. यह प्रोटीन, कैल्शियम, फैट, लैक्टोज, मिनरल्स आदि का अच्छा स्रोत होता है. गाय, भैंस, बकरी के दूध के अलावा सोयाबीन, बादाम इत्यादि का दूध भी बाजार में उपलब्ध है.
100 एमएल गाय के दूध में 3.2 ग्राम प्रोटीन, 4.1 ग्राम फैट, 67 किलो कैलोरी ऊर्जा, 172 मिग्रा कैल्शियम, 120 मिग्रा फॉस्फोरस, 73 मिग्रा सोडियम और 120 मिग्रा पोटैशियम होता है. भैंस के दूध में गाय के दूध की तुलना में सोडियम-पोटैशियम कम और प्रोटीन, फैट, एनर्जी, कैल्शियम, फॉस्फोरस ज्यादा होता है. दूध में आयरन, विटामिन सी और एंटी आॅक्सीडेंट्स आदि बहुत कम होते हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए दूध को तो खाने में शामिल करें ही साथ ही आयरन, विटामिन सी आदि के लिए हरी सब्जियों को भोजन में शामिल करें.
स्किम्ड मिल्क : इसमें फैट की मात्रा 0.5-2% तक होती है. इसके विटामिन ए और डी से फोर्टिफाइड किया जाता है. लो कैलोरी डायट या हाइ प्रोटीन डायट में इसे लेने की सलाह दी जाती है. वजन और हाइ कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार है.
टोंड मिल्क : यह भैंस के दूध और स्किम्ड मिल्क से बनता है. इसमें फैट 3% से कम नहीं होता है. बीएमआइ 29 से कम हो, तो इसे लेने की सलाह दी जाती है. इसके ऊपर जमनेवाली मलाई हटा कर स्किम्ड मिल्क का लाभ ले सकते हैं.
डबल टोंड मिल्क : यह गाय और भैंस के दूध को मिला कर या फ्रेश स्किम्ड मिल्क या स्किम्ड मिल्क पाउडर से बनता है. यह पाश्चुराइज्ड होता है और इसमें फैट 1.5% से भी कम होता है. मोटापा, डायरिया, फैटी लिवर और अल्सर में यह फायदेमंद है.
फ्लेवर मिल्क : इस दूध में चॉकलेट, कॉफी, फूड कलर, केन-शूगर इत्यादि मिलाया जाता है.
स्टरलाइज्ड मिल्क : गाय या भैंस के दूध को लगातार 115 डिग्री सेल्सियस पर 15 मिनट तक रखा जाता है. इससे इसमें मौजूद कीटाणु नष्ट हो जाते हैं. इस दूध को कमरे के तापमान पर 80-85 दिनों तक रखा जा सकता है. यह दूध वैसी जगहों के लिए है, जहां दूध पहुंचने में परेशानी हो.
स्टैंडर्डाइज्ड मिल्क : यह भैंस के दूध और स्किम्ड मिल्क को मिला कर बनाया जाता है. इसमें फैट की मात्रा 4-5% तक रखी जाती है. कमजोरी, लो कैिल्शयम, लो फैट और बीएमआइ 18 से कम हो, तो यह दूध फायदेमंद है.
ड्राइ मिल्क : यह संपूर्ण दूध से बनता है. इसे बिना फ्रिज के लगभग छह महीने तक रखा जा सकता है. इस तकनीक में दूध को स्प्रे ड्राइंग या वैक्यूम ड्राइंग तकनीक से 97% तक सुखा दिया जाता है. पाउडर को पुन: लिक्विड में बदल कर इस्तेमाल में लाया जाता है. जहां दूध नहीं मिलता है वहां इसका प्रयोग होता है.
क्या है पाश्चुराइजेशन
आजकल यह शब्द दूध या दूध से बने अधिकतर प्रोडक्ट के पैक पर लिखा होता है. इस प्रक्रिया में दूध को एक निश्चित तापमान तक ले जाया जाता है. ताकि उसमें मौजूद कीटाणु नष्ट हो जाएं. लेकिन इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि दूध की गुणवत्ता नष्ट न हो. उसके बाद दूध को पुन: सामान्य तापक्रम तक ठंडा किया जाता है. इससे फिर उसमें कीटाणु नहीं पनप पाते हैं. लगभग सभी मिल्क प्रोडक्ट को बनाने में इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है.
Source: prabhatkhabar
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