बेवजह वज़न कम होना एक सीरियस मुद्दा हो सकता है

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 Causes of Unexpected Weight Loss in Hindi1. डायबिटीज (Diabetes Due to Obesity)

डायबिटीज एक मेटाबोलिक डिसऑर्डर है जिसमें ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है क्योंकि या तो शरीर में इन्सुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता या फिर हमारा शरीर उस इन्सुलिन के हिसाब से रियेक्ट नहीं करता या फिर दोनों कारण एक साथ हों।

लक्षण: बार बार बाथरूम जाना, अत्यधिक भूख और प्यास लगना, वज़न बढ़ना (टाइप 2 डायबिटीज), ज़रूरत से ज्यादा वज़न कम होना (टाइप 1 डायबिटीज), थकान, चोटों का जल्दी ठीक न होना, हाथों में झंझनाहट का एहसास या कुछ भी महसूस न होना। 

2. डिप्रेशन (Depression Due to Obesity)

डिप्रेशन एक मानसिक असंतुलन की स्थिति है जिसमें दुःख, गुस्सा, कुछ खोने का गम या फ्रस्ट्रेशन जैसे भाव अकसर या हमेशा ही दिमाग पर हावी रहते हैं।

लक्षण: नींद की कमी या ज़रूरत से ज्यादा सोना, किसी चीज़ में ध्यान न लगना, नकारात्मक विचार, असहाय या नाउम्मीदी से ग्रस्त होना, चिडचिडा होना, आत्महत्या की सोचना और वज़न तेज़ी से घटना। 

3. थाइरोइड ओवरएक्टिव होना (Overactive Thyroid Due to Obesity)

थाइरोइड ग्रंथि थाइरोइड नामक हार्मोन बनाती है जो हमारे शरीर के मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करते हैं, जैसे ह्रदय की धड़कन, हम कितनी जल्दी कैलोरीज कम करते हैं और हमारी पाचन क्रिया को भी। जब थाइरोइड हार्मोन बहुत ज्यादा बनने लगते हैं तो इसे “हाइपर-थाइरोइडिसम” कहा जाता है।

लक्षण: घबराहट, धड़कन का तेज़ एवं अनियमित होना, अचानक गर्मी लगना और पसीना आना, तेज़ी से वज़न कम होना, सांस में तकलीफ, डर लगना, आँखें बाहर आना, मूड-स्विंग्स, बांझपन या फिर फिजिकल रिलेशंस के प्रति उदासीन होना। 

4. टी.बी./ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis Due to Obesity)

टी.बी. एक खतरनाक और फैलने वाली बीमारी है। ये आम तौर पर फेफड़ों पर असर डालती है, इसका असर किडनी, रीढ़ की हड्डी और दिमाग पर भी हो सकता है। इस बीमारी को 6 महीने के एंटीबायोटिक कोर्स के द्वारा ख़त्म किया जा सकता है।

लक्षण: खांसी में बलगम या खून निकलना, छाती में दर्द, थकान, बेवजह वज़न कम होना, बुखार एवं रात्री में पसीना आना।

5. कैंसर (Cancer Due to Obesity)

शरीर में अनियंत्रित रूप से एब्नार्मल सेल्स का बढ़ना कैंसर कहलाता है। कैंसर त्वचा में, इंटरनल ओरगंस को कवर करने वाले टिश्यु में, या फिर हड्डियों, कार्टिलेज, फैट, मसल्स, ब्लड वेसल्स, या फिर किसी और कनेक्टिव टिश्यु या खून बनाने वाले टिश्यु जैसे बोन मेरो या रोग प्रतिरोधक सेल्स जैसे लिम्फोमा या मायलोमा में हो सकता है।

लक्षण: कैंसर के संकेत और लक्षण उसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। कुछ आम लक्षण हैं: अचानक वज़न कम होना, असामान्य रूप से मसल्स या जोड़ों का दर्द, थकान, रात में पसीना आना, त्वचा में गांठ बनना। 

6. एच.आई.वी./एड्स (AIDS Due to Obesity)

ह्यूमन इम्युनोडेफिशियेंसी वायरस(एच.आई.वी.) किसी भी अन्य वायरस की तरह ही है, फर्क सिर्फ इतना है हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बाकी वायरस को तो शरीर के बाहर निकाल सकती है किन्तु इस वायरस को नहीं। एच.आई.वी. हमारे इम्यून सिस्टम का सर्वनाश कर देता है और हमारा शरीर किसी भी इन्फेक्शन से लड़ने में असक्षम हो जाता है और एड्स इस इन्फेक्शन का आखरी चरण है।

लक्षण: इस इन्फेक्शन में बुखार, रैश, गला ख़राब होना, मासपेशियों में दर्द, गले में सूजन, मुँह में अलसर एवं थकान होती है। इनके अलावा एकदम से वज़न कम होना, साँस लेने में तकलीफ, खांसी, लगातार दस्तें लगना और नज़र का धुंधला एवं कमज़ोर होना, ये सब लक्षण भी होते हैं। 

7. पार्किन्संस डिजीज (Parkinson Due to Obesity)

यह नर्वस सिस्टम का प्रोग्रेसिव डिसऑर्डर है जिसमे शरीर और चेहरे में कड़कपन आ जाता है और सभी गतिविधियां धीमी हो जाती हैं। इस बीमारी का संपूर्ण रूप से इलाज तो नहीं है मगर दवाई से इसके लक्षणों को सुधारा जा सकता है।

लक्षण: बिगड़ा हुआ पोस्चर व संतुलन, शरीर की कुदरती गतिविधियों का न होना जैसे पलक झपकाना, मुस्कुराना और चलते समय हाथों का हिलना, मासपेशियों में अकडन, बोलने और लिखने के अंदाज़ में परिवर्तन और एकदम वज़न कम होना। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों का बीमारी का पता चलने से पहले ही वज़न कम होने लगता है क्योंकि उनमें सूंघने और स्वाद लेने की शक्ति ख़त्म होने लगती है। दवा चालू होते ही ये समस्या ठीक होने लगती है। वज़न कम होने की वजह सिर्फ इसी बीमारी को ना माना जाए जब तक कि ये पता न चले कि कैंसर और डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं के खतरे का असर नहीं है।

 डॉक्टर के पास कब जाएँ? (When to Visit Doctor)

जब आपका वज़न 4.5 से 5 किलो कम होने लगे या आपके कुल वज़न का 5% सिर्फ 6-12 महीने में कम होने लगे और आप कारण से अनजान हैं तो आपको अचानक वज़न कम होने या बिना कारण वज़न कम होने की समस्या है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। जितना जल्दी ये बीमारी पकड़ में आएगी उतनी जल्दी इलाज चालू होने से फायदा होगा।

Source: healthindian

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