वर्धवान सलाह देते हैं, “कॉफी बिना चीनी के पीनी चाहिए. अगर आप चीनी मिलाते हैं तो यह कैफीन के असर को कम कर देता है. साथ ही या तो बेहद कम दूध डालें या बिना दूध की कॉफी पीएं.”

कॉफी में पाए जानेवाले विभिन्न तत्व लिवर पर अच्छा असर डालते हैं. इन तत्वों में कैफीन, कॉफी का तेल कहवोयल, कैफेस्टोल और कॉफी बीन में पाए जानेवाले एंटीआक्सीडेंट पदार्थ हैं.

सरोज सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीनीयर कंसलटेंट (गैस्ट्रोइंटरोलॉजी) डॉ. रमेश गर्ग बताते हैं, “एपीडेमियोलॉजिकल अध्ययन में दृढ़ता से यह सुझाव दिया गया है कि रोजाना लगभग तीन कप कॉफी पीने से लीवर के नुकसान का खतरा घट जाता है जो इटियोलॉजिकल एजेंट के एक किस्म की वजह से होता है.”

गर्ग सलाह देते हैं, “कॉफी उन लोगों के लिए भी सुरक्षित है जो लिवर की बीमारी से जूझ रहे हैं. लेकिन यह समझना चाहिए कि संयम एक कुंजी है और डॉक्टर की सलाह से ही इसे लेना चाहिए.”

इटली के शोधकर्ताओं के एक दल ने इस महीने निष्कर्ष निकाला था कि 5-6 कप रोजाना कॉफी पीने से नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजिज (एनएएफएलडी) से बचाव होता है.

इटली के नापोली विश्वविद्यालय के विंसेंजो लेंबो का कहना है, “पूर्व के शोधों से इसकी पुष्टि होती है कि कैफीन एनएएफएलडी के नुकसान की भरपाई करता है, लेकिन आंतों की गड़बड़ियों को भी कैफीन ठीक करता है. इसका पता पहली बार चला है.”

Source: palpalindia

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