अमृत से कम नहीं है गिलोय, हर बीमारी की ये है दवा!

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उपचार की वैकल्पिक कही जाने वाली पद्धतियां, वास्तव में प्राथमिक हैं। इन पद्धतियों की औषधियों और उपचारों में बहुधा ऐसे तत्वों व जड़ी-बूटियों का उपयोग होता है, जो हमारे आसपास प्रकृति में आसानी से मिल जाते हैं। आयुर्वेद में ऐसे ही एक चमत्कारिक जड़ी-बूटी है – गिलोय, जैसा नाम, वैसा काम

आयुर्वेद में गिलोय को अमृत बेल भी कहा जाता है। कारण है, न तो यह खुद मरती है और न ही सेवन करने वाले को कोई रोग होने देती है। गिलोय का सेवन किसी भी उम्र के व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है। यह चमत्कारिक जूड़ी-बूटी दस्त जैसे सामान्य से लेकर डेंगू व कैंसर जैसे प्राण घातक रोगों में भी बहुत लाभदायक है। dयह भारत में 1 हजार फीट की ऊंचाई तक सर्वत्र पाई जाती है।

अमृत से कम नहीं है गिलोय, हर बीमारी की ये है दवा!

आयुर्वेद में गिलोय को अमृत बेल भी कहा जाता है। कारण है, न तो यह खुद मरती है और न ही सेवन करने वाले को कोई रोग होने देती है।

प्राकृतिक आवास और संरचना

गिलोय, बेल के रूप में देश के लगभग हर कोने में पाई जाती है। खेतों की मेंड़, घने जंगल, घर के बगीचे, मैदानों में लगे पेड़ों के सहारे कहीं भी गिलोय की बेल प्राकृतिक रूप से अपना घर बना लेती है। इसके पत्ते देखने में पान की तरह और हरे रंग के होते हैं। समय होने पर इसमें गुच्छे में छोटे लाल बेर से कुछ छोटे फल भी लगते हैं।

वैज्ञानिकों ने गिलोय के पौधे में से विभिन्न प्रकार के तत्वों को प्राप्त किया है। गिलोय में बरबेरिम, ग्लुकोसाइड गिलाइन आदि रासायनिक तत्व पाए जाते हैं। इसके काण्ड से एक स्टार्च (गुडूची सत्व) निकलता है, जो त्रिदोषशामक है।

स्वास्थ्य लाभ

गिलोय के 10 इंच का टुकड़ा और तुलसी के 8-10 पत्ते लेकर पेस्ट बना लें। उसको पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। इसको दिन में 2 बार लेने से बुखार उतरता है। बच्चों और बड़ों, दोनों में दृष्टि कमजोर हो जाना सामान्य दोष है। 10 मिली गिलोय का रस, शहद या मिश्री के साथ सेवन करने पर दृष्टि लाभ निश्चित है।

रक्त विकार के कारण पैदा होने वाले रोगों जैसे खाज, खुजली, वातरक्त आदि में शुद्ध गुगुल के साथ लेने से लाभ होता है। इससे अमृतादि गुग्गलू बनाया जाता है। गिलोय का काढ़ा मूत्र विकरों में भी लाभदायक है। गिलोय के काढ़े में अरंडी का तेल मिलाकर सेवन करने से जटिल संधिवात रोग भी दूर होता है। गिलोय के अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं।

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विशेषज्ञों ने पाया कि गिलोय में रोग प्रतिरोधक प्रणाली के आलावा कई तरह के बेहतर गुण हैं। इसके एंटी-स्ट्रेस और टॉनिक गुणों को भी क्लीनिकली प्रमाणित किया जा चुका है। बच्चों में इसके बहुत अच्छे नतीजे प्राप्त हुए, कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि गिलोय या अमृता पर यथा नाम, तथा गुण सही बैठता है।
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