टहलने से समाजीकरण के साथ स्वास्थ्य लाभ भी

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टहलने से समाजीकरण के साथ स्वास्थ्य लाभ भी

‘चलो कुछ दूर टहल आएं’ अपने किसी परिचित का ऐसा आग्रह हम अक्सर स्वीकार कर लेते हैं। टहलने से एक ओर जहां हमारा समाजीकरण होता है तो दूसरी ओर स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। टहलना अत्यन्त सरल तथा लाभप्रद व्यायाम है। सहज रूप से टहलने से हमें वे सभी लाभ प्राप्त हो जाते हैं जो व्यायाम करने से मिलते हैं।

टहलने का श्वास गति, हृदय गति तथा रक्त प्रवाह पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। टहलते समय श्वास−प्रश्वास की गति तेज होने से हानिकारक तत्व प्रश्वास के जरिए तेजी से बाहर निकलते हैं। टहलने से पाचन प्रणाली भी उत्तेजित होती है। कब्ज से परेशान लोगों को तो अवश्य ही टहलना चाहिए। टहलने से भूख भी बढ़ती है। टहलना शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जितना लाभदायक होता है उससे कहीं अधिक फायदा हमारे मानसिक स्वास्थ्य को पहुंचाता है।
टहलते समय शारीरिक मुद्रा का ध्यान रखना चाहिए अन्यथा अभीष्ट लाभ नहीं मिलता। टहलते समय शरीर सीधा तथा तना होना चाहिए। टहलते समय मुंह बिल्कुल बंद होना चाहिए तथा सांस पूरी तरह नाक से ही लेना चाहिए।
टहलने से मन को शांति मिलती है तथा काम क्रोध और ईर्ष्या जैसे मनोदोषों का शमन करने में सहायता मिलती है। विद्यार्थियों के लिए सुबह टहलना बहुत ही लाभदायक होता है क्योंकि प्रातःकाल नियमित रूप से टहलने से एकाग्रता का सहज विकास होता है। टहलने से रात को गहरी तथा पूरी नींद आती है तथा शरीर को असीम शांति मिलती है।
विभिन्न अनुसंधान बताते हैं कि प्रातःकाल टहलने से शरीर में स्रावित होने वाले विभिन्न हारमोन नियंत्रित तथा नियमित होते हैं। अंतस्रावी ग्रंथियों की कार्यप्रणाली नियमित होने से हारमोन असंतुलन से उठने वाली अनेक समस्याएं नियंत्रित होती हैं। मस्तिष्क में तनाव पैदा करने वाले रसायनों में भी परिवर्तन आता है जिससे हमारे मूड पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
टहलना एक प्राकृतिक प्रशांतक है जिससे मस्तिष्क की विभिन्न संरचनाएं तनावरहित होकर शिथिल हो जाती हैं इससे मन तथा मस्तिष्क को सुकून मिलता है। इससे हमारा मूड खुशनुमा बनता है। नियमित रूप से टहलने से आत्मविश्वास बढ़ता है तथा मन में शांति के स्थायी भाव पैदा होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, टहलने से मस्तिष्क में एंडोर्फिन हारमोन स्रावित होता है जिससे हमारा मूड परिवर्तित होता है तथा सकारात्मक भावनाएं पैदा होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, टहलने से हमारे आसपास के लोगों से हमारे संबंधों में भी सुधार आता है। उदाहरण के लिए यदि पति और पत्नी यदि साथ−साथ टहलते हैं तो उनमें अंतरंगता बढ़ती है तथा उनमें मैं के स्थान पर हम के भाव पैदा होते हैं। साथ ही उनमें परस्पर सहारा देने की भावना और परस्पर विश्वास के भाव भी गहरे होने लगते हैं।
जब हम टहलने के लिए बाहर निकलते हैं तो घर के वातावरण, जिम्मेदारियों तथा तनाव पैदा करने वाले कारकों से चाहे अस्थायी रूप से ही सही परन्तु कुछ देर के लिए मुक्ति पा जाते हैं जिससे अवसाद हम पर हावी नहीं हो पाता। दूसरी ओर यदि हम समूह में टहलते हैं तो आपस में हंसी−मजाक होता है जिससे हमारा मनोदैहिक स्वास्थ्य सुधरता है। अनुसंधानों से सिद्ध होता है कि हंसने से रक्त संचार तेज होता है जिससे दिमागी समस्याओं से पीड़ित रोगियों को लाभ होता है क्योंकि रक्त संचार में वृद्धि होने से मस्तिष्क को अधिक आक्सीजन तथा ग्लूकोज पहुंचता है।
टहलने से हमें मानसिक प्रसन्नता प्राप्त होती है। हममें सकारात्मक भावनाओं का संचार होता है। भावनाओं का हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से गहरा संबंध होता है। विशेषज्ञों की राय में आशावादी व्यक्ति तनाव का अनुभव कम करते हैं इससे रोग प्रतिरोधी क्षमता उत्तम बनी रहती है।
हालांकि टहलने के लिए कोई भी समय चुना जा सकता है परन्तु फिर भी प्रातः चार से छह बजे तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है। प्रातः काल टहलने से आप पूरे दिन स्फूर्ति तथा ताजगी महसूस करते हैं।

 

Source: prabhasakshi

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